बूँदी। हाड़ौती की वीर प्रसूता माटी के स्वर्णिम इतिहास और सांस्कृतिक वैभव को एक सूत्र में पिरोने वाला ऐतिहासिक क्षण आज उस समय साकार हुआ, जब भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष छगन माहुर के निवास पर प्रख्यात साहित्यकार डॉ. अरविंद सक्सेना की नवीनतम कृति 'बून्दी की धरोहर' का विधिवत विमोचन किया गया। यह पुस्तक मात्र एक संकलन नहीं, बल्कि बूँदी के उस गौरवशाली अतीत का गहन शोधपरक दस्तावेज है, जो सदियों से अपनी पहचान को संजोए हुए है।

विमोचन के दौरान छगन माहुर ने डॉ. सक्सेना के अटूट परिश्रम और लेखन शैली की सराहना करते हुए कहा कि हाड़ौती की संस्कृति और उसके संरक्षण की दिशा में यह पुस्तक मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने रेखांकित किया कि आने वाली पीढ़ियों के लिए अपने पूर्वजों के शौर्य और कलात्मक कौशल को समझना अत्यंत आवश्यक है, और डॉ. सक्सेना ने इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाया है। पुस्तक के पन्नों में बूँदी के अजेय किलों की प्राचीरों, अद्वितीय स्थापत्य कला और यहाँ के शासकों के पराक्रम से भरे ऐतिहासिक घटनाक्रमों का सूक्ष्मता से वर्णन किया गया है, जो पाठक को इतिहास के गलियारों में ले जाता है।

इस गरिमामयी अवसर पर समाज के विभिन्न वर्गों की सहभागिता रही, जिसमें मुख्य रूप से अम्बेडकर सामाजिक समरसता समिति के महासचिव राजीव कुमार और सुरेश उपाध्याय उपस्थित रहे। अतिथियों ने डॉ. सक्सेना के इस शोध कार्य को क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने वाला एक क्रांतिकारी कदम बताया। यह पुस्तक न केवल शोधार्थियों के लिए संदर्भ ग्रंथ बनेगी, बल्कि हाड़ौती के पर्यटन और ऐतिहासिक गौरव को वैश्विक पटल पर एक नई पहचान दिलाने में भी सहायक सिद्ध होगी।

Pratahkal Bureau

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