कोटा। शिक्षा नगरी कोटा की धरा 31 दिसंबर को एक ऐसी आध्यात्मिक और ऐतिहासिक घटना की साक्षी बनी, जिसने सनातन संस्कृति की अटूट श्रद्धा को जन-जन के मानस पटल पर अंकित कर दिया। अवसर था दिव्य श्री सोमनाथ शिवलिंग यात्रा का, जिसमें हाड़ौती अंचल के कोने-कोने से आए हजारों श्रद्धालुओं के सैलाब ने कोटा की सड़कों को भक्ति के सागर में सराबोर कर दिया। यह भव्य आयोजन केवल एक धार्मिक यात्रा मात्र नहीं था, बल्कि विदेशी आक्रांताओं के विध्वंस पर भारत की अदम्य आध्यात्मिक शक्ति की विजय का जीवंत उद्घोष बनकर उभरा।

इस दिव्य आयोजन का मूल उस गौरवशाली इतिहास से जुड़ा है, जो 1024 ईस्वी में महमूद गजनवी द्वारा सोमनाथ मंदिर के विध्वंस के बाद शुरू हुआ था। पौराणिक मान्यताओं और ऐतिहासिक प्रमाणों के अनुसार, उस कठिन समय में अग्निहोत्री ब्राह्मणों ने शिवलिंग के मूल अंशों को सुरक्षित बचाकर दक्षिण भारत ले जाने का साहस किया था। लगभग एक सहस्राब्दी तक इन अंशों से निर्मित 11 लघु शिवलिंगों की गुप्त रूप से पूजा होती रही। आज उन्हीं ऐतिहासिक मूल अंशों के सार्वजनिक दर्शनों ने कोटावासियों को कृतार्थ कर दिया।

इस यात्रा की दिव्यता को उस समय और अधिक वैज्ञानिक और आध्यात्मिक बल मिला, जब गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जी के मार्गदर्शन में हुए भू-वैज्ञानिक अनुसंधान में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि ये शिवलिंग जिस पदार्थ से निर्मित हैं, उसकी प्रकृति पृथ्वी पर उपलब्ध तत्वों से सर्वथा भिन्न है। इस रहस्यमयी खोज ने श्रद्धालुओं के भीतर महादेव के प्रति अटूट विश्वास और जिज्ञासा को एक नई ऊंचाई प्रदान की है।

यात्रा का भव्य शुभारंभ सायंकाल 4 बजे श्री नीलकंठ महादेव मंदिर, टिपटा रेतवाली से हुआ। जैसे-जैसे यात्रा दशहरा मैदान और शक्ति नगर मार्ग से आगे बढ़ी, समूचा वातावरण 'हर-हर महादेव' और 'जय सोमनाथ' के गगनभेदी जयघोष से गुंजायमान हो उठा। मार्ग के दोनों ओर खड़े हजारों लोगों ने पुष्पवर्षा और भजन-कीर्तन के माध्यम से अपनी श्रद्धा अर्पित की। यात्रा का समापन गोदावरी बालाजी मंदिर में हुआ, जहाँ मध्य रात्रि तक हजारों की संख्या में नर-नारियों ने कतारबद्ध होकर शिवलिंग के दर्शन किए और पुण्य लाभ अर्जित किया।

इस वृहद और ऐतिहासिक आयोजन की सफलता के पीछे आर्ट ऑफ लिविंग के कार्यकर्ताओं की निष्ठा और अथक परिश्रम का बड़ा योगदान रहा। आयोजन के सफल समन्वय में जिला शिक्षक समन्वयक राजीव गुप्ता, राजस्थान एपेक्स मेंबर योगेन्द्र हर्सोरा, ज़ोनल टीचर कोऑर्डिनेटर प्रमोद गौतम, वीडीएस कोर्डिनेटर सुनीता कौल, रूचि व्यास, अंजू शर्मा और नवीन शिनानी सहित अनेक स्वयंसेवकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आयोजकों ने इस यात्रा के संदेश को स्पष्ट करते हुए कहा कि सनातन धर्म शाश्वत है और इसे किसी भी कालखंड में नष्ट नहीं किया जा सकता। कोटा के धार्मिक इतिहास में यह आयोजन शांति, अखंडता और सकारात्मक ऊर्जा के एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में सदैव याद रखा जाएगा।

Bhagvati Medatwal, Kota

Bhagvati Medatwal, Kota

नाम: भगवती मेड़तवाल

वर्तमान पद: रिपोर्टर / प्रातःकाल प्रतिनिधि (कोटा)

कार्यक्षेत्र: कोटा (राजस्थान) एवं आमेट तहसील क्षेत्र

बीट (मुख्य विषय): स्थानीय समाचार, राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिज़नेस एवं सभी विषय

परिचय 

भगवती मेड़तवाल 'प्रातःकाल' समाचार पत्र में कोटा प्रतिनिधि और रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह कोटा जिले के साथ-साथ आमेट तहसील क्षेत्र से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को कवर करती हैं। स्थानीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और राजनीतिक घटनाक्रमों के अलावा आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने कला स्नातक (B.A.) की डिग्री हासिल की है।

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