कोटा। ऑपरेशन थिएटर, स्लिट लैम्प और लेज़र की तकनीकी दुनिया से बाहर निकलकर जब नेत्र चिकित्सा विज्ञान के विशेषज्ञ प्रकृति की गोद में पहुँचे, तो चंबल नदी की शांत धारा एक जीवंत प्रयोगशाला में परिवर्तित हो गई। देश के विभिन्न भागों से नेत्र प्रशिक्षण हेतु सुवि आई हॉस्पिटल, कोटा आए नेत्र चिकित्सकों और रेटिना फेलोज़ के लिए चंबल सफारी केवल एक पर्यटन गतिविधि नहीं रही, बल्कि विज्ञान और प्रकृति के गहन संवाद का सशक्त अनुभव बन गई।

चंबल की स्वच्छ, अविचल और पारदर्शी धारा पर आगे बढ़ती नाव के साथ यह अनुभूति और गहरी होती गई। जल में उतरती सूर्य किरणें ठीक उसी प्रकार चमक बिखेर रही थीं, जैसे आँख के फंडस पर पड़ती रोशनी रेटिना की परतों को क्रमशः उजागर करती है। इस यात्रा में सुवि आई हॉस्पिटल के वरिष्ठ नेत्र सर्जन एवं निदेशक डॉ. सुरेश पाण्डेय, रेटिना विशेषज्ञ डॉ. निपुण बागरेचा, नेत्र विशेषज्ञ खुशबू जैन और डॉ. डिंपल भाकुनी (बरेली) के साथ रेटिना फेलोज़ डॉ. ऐश्वर्या पार्थसारथी (मुंबई), डॉ. प्रेरणा जगदाआने (पुणे) और डॉ. अपर्णा घोटके (नासिक) शामिल रहे।

डॉ. सुरेश पाण्डेय ने चंबल नदी की स्वच्छता और पारदर्शिता को एक स्वस्थ रेटिना से जोड़ा, जो बिना किसी अवरोध के प्रकाश को ग्रहण कर मस्तिष्क तक स्पष्ट संकेत पहुँचाती है। नाव के नीचे लगभग अदृश्य रूप से मौजूद घड़ियाल और मगरमच्छ रेटिना की उन गहराइयों की याद दिला रहे थे, जहाँ कई रोग प्रारंभिक अवस्था में छिपे रहते हैं और केवल प्रशिक्षित दृष्टि ही उन्हें पहचान सकती है। चंबल में हो या रेटिना की जाँच में, क्षण भर की असावधानी गंभीर परिणाम दे सकती है।

रेटिना विशेषज्ञ डॉ. निपुण बागरेचा ने बताया कि आकाश में उड़ते पक्षी और वृक्षों पर बैठे गिद्ध प्रकृति के सूक्ष्म संतुलन का प्रतीक हैं। ठीक इसी तरह रेटिना भी प्रकाश, रक्त प्रवाह और तंत्रिकाओं के नाज़ुक सामंजस्य से कार्य करती है। डॉ. ऐश्वर्या पार्थसारथी के अनुसार, जैसे चंबल का इकोसिस्टम अत्यंत संवेदनशील है और थोड़ा सा प्रदूषण उसके अस्तित्व को प्रभावित कर सकता है, वैसे ही रेटिना मधुमेह, उच्च रक्तचाप और उम्र से जुड़ी बीमारियों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील रहती है। डायबिटिक रेटिनोपैथी और मैक्युलर डिजनरेशन धीरे-धीरे दृष्टि को क्षीण करते हैं, ठीक उसी तरह जैसे प्रदूषण नदी की जीवनदायिनी क्षमता को कम कर देता है।

डॉ. डिंपल भाकुनी ने कहा कि जल पर पड़ती सुनहरी किरणें फोविया पर पड़ने वाली रोशनी की तरह दृष्टि की तीक्ष्णता को परिभाषित कर रही थीं। चंबल की शांति ने यह संदेश भी दिया कि चिकित्सा केवल मशीनों और तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि संवेदनशीलता, धैर्य और प्रकृति से जुड़ाव से और अधिक प्रभावी बनती है।

सफारी के समापन पर सभी चिकित्सकों ने हाड़ौती क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने का संकल्प लिया और कोटा व आसपास के प्राकृतिक स्थलों, विशेषकर चंबल सफारी, को अपने परिजनों और परिचितों तक पहुँचाने का निर्णय किया। डॉ. प्रेरणा जगदाआने और डॉ. अपर्णा घोटके ने बताया कि जैसे सफल रेटिना उपचार के बाद रोगी की दुनिया पुनः रोशन हो जाती है, वैसे ही इस यात्रा ने सभी प्रतिभागियों के भीतर नई ऊर्जा, नई दृष्टि और प्रकृति के प्रति गहरा सम्मान जगा दिया। यह दिन विज्ञान और प्रकृति के उस सुंदर संगम का प्रतीक बन गया, जहाँ चंबल नदी और आँख का रेटिना एक-दूसरे की भाषा बोलते प्रतीत हुए।

Pratahkal Newsroom

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