कोटा, 5 जनवरी। समय का चक्र अपनी गति से घूमता रहता है, लेकिन कुछ यादें और रिश्ते वक्त की धूल से धुंधले नहीं होते। शिक्षा की नगरी कोटा में रविवार को कुछ ऐसा ही भावुक और गौरवशाली दृश्य देखने को मिला, जब जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) के एसटीसी बैच 1998-2000 के पूर्व छात्राध्यापक अपनी रजत जयंती मनाने के लिए एक छत के नीचे एकत्रित हुए। पच्चीस वर्षों के लंबे अंतराल के बाद जब ये पूर्व विद्यार्थी, जो आज राजस्थान समेत अन्य राज्यों में शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, अपने पुराने परिसर में लौटे, तो माहौल पुरानी यादों की खुशबू से महक उठा।

समारोह का आगाज बेहद भव्य और भावनात्मक रहा। शिक्षा सहकारी 696 कोटा के अध्यक्ष प्रकाश जायसवाल के मुख्य आतिथ्य में आयोजित इस कार्यक्रम में उन व्याख्याताओं को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था, जिन्होंने ढाई दशक पहले इन छात्राध्यापकों के भविष्य की नींव रखी थी। वर्तमान में 75 से 80 वर्ष की आयु के ये गुरुजन, जो अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जब कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे तो उनके पूर्व शिष्यों ने पलक पावड़े बिछा दिए। ढोल-नगाड़ों की थाप, गगनभेदी आतिशबाजी और पुष्प वर्षा के बीच अपने शिक्षकों का स्वागत करते हुए कई शिक्षकों की आंखें नम हो गईं।

कार्यक्रम के संयोजक राजेन्द्र गौड़ ने बताया कि यह केवल एक मिलन समारोह नहीं, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा का जीवंत उदाहरण था। मंच पर उस दौर के दिग्गज व्याख्याताओं डॉ. एमएल जैन, मानमल श्रृंगी, कृष्णानंद गौत्तम, रामेश्वर गर्ग, श्यामा गौरी शर्मा, नानकराम भागवानी, वीरेंद्र खत्री और आभा शर्मा का माल्यार्पण कर, शाल ओढ़ाकर एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया गया। इस दौरान राजस्थान के कोने-कोने के साथ-साथ दिल्ली और गुजरात से भी शिक्षक इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने के लिए कोटा पहुंचे थे।

समारोह में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने चार चांद लगा दिए। दिलचस्प बात यह रही कि कई शिक्षकों ने वही प्रस्तुतियां दोहराईं जो उन्होंने 25 वर्ष पूर्व छात्र जीवन के दौरान कॉलेज के मंच पर दी थीं। इन प्रस्तुतियों ने वहां उपस्थित हर व्यक्ति को समय के पीछे ले जाकर खड़ा कर दिया। कोटा डाइट के वर्तमान व्याख्याता सांवरिया सोनी ने संस्थान की ओर से सभी पूर्व छात्राध्यापकों का स्वागत किया और उन्हें वर्तमान में शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों से अवगत कराया। कार्यक्रम के अंतिम चरण में सहसंयोजक सुरभि खंडेलवाल ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त करते हुए इस आयोजन को सफल बनाने के लिए धन्यवाद दिया। यह आयोजन इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि पद और प्रतिष्ठा चाहे कितनी भी बढ़ जाए, शिक्षा के मंदिर और गुरु का स्थान सदैव सर्वोच्च रहता है।

Pratahkal Bureau

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