इंद्रेश कुमार महाराज ने कोटा में विद्यार्थियों को दिया सफलता का मंत्र
मथुरा-वृंदावन के युवा कथावाचक ने मोशन एजुकेशन के 10,000 छात्रों को ईमानदारी से प्रयास करने और सकारात्मक सोच के साथ लक्ष्य प्राप्त करने हेतु प्रेरित किया।

कोटा के कॉमर्स कॉलेज परिसर में आयोजित मोशन एजुकेशन के कार्यक्रम में उपस्थित कथावाचक इंद्रेश कुमार महाराज (मध्य में हाथ जोड़े हुए) और साथ में संस्थान के संस्थापक नितिन विजय।
शिक्षा नगरी कोटा में बुधवार को अध्यात्म, प्रेरणा और सकारात्मक ऊर्जा का एक अभूतपूर्व संगम देखने को मिला, जहाँ मथुरा-वृंदावन के सुप्रसिद्ध युवा कथावाचक इंद्रेश कुमार महाराज ने मोशन एजुकेशन के हजारों विद्यार्थियों को जीवन की सार्थकता और सफलता के गूढ़ रहस्यों से अवगत कराया। कॉमर्स कॉलेज परिसर में आयोजित इस भव्य और प्रेरणादायक कार्यक्रम में इंद्रेश कुमार महाराज ने युवाओं को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि जीवन में पूरी ईमानदारी और अटूट समर्पण के साथ प्रयास करना ही सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य अपना शत-प्रतिशत योगदान देता है, तो नियति उसे उसका प्रतिफल अवश्य प्रदान करती है। महाराज ने विद्यार्थियों को ढांढस बंधाते हुए यह भी कहा कि यदि कभी अपेक्षित परिणाम प्राप्त न हों, तो यह विश्वास रखना चाहिए कि ईश्वर ने आपके लिए उससे भी अधिक बेहतर और कल्याणकारी मार्ग निर्धारित कर रखा है।
मोशन एजुकेशन द्वारा आयोजित इस विशेष सत्र में दस हजार से अधिक छात्र-छात्राओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम के औपचारिक पड़ाव पर संस्थान के चेयरमैन सुरेंद्र विजय, डायरेक्टर सुशीला विजय, फाउंडर एवं प्रसिद्ध शिक्षक नितिन विजय, डॉ. स्वाति विजय सहित ज्वाइंट डायरेक्टर रामरतन द्विवेदी और अमित वर्मा व अन्य वरिष्ठ सदस्यों ने इंद्रेश कुमार महाराज का भावभीना स्वागत किया। समारोह का शुभारंभ भक्तिमय भजनों और आध्यात्मिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ, जहाँ महाराज एवं उनकी मंडली के मधुर स्वरों ने संपूर्ण परिसर को भक्ति के रस में सराबोर कर दिया। विद्यार्थियों ने भी इस आध्यात्मिक प्रवाह में अत्यंत उत्साह के साथ सहभागिता की।
अपने उद्बोधन के दौरान इंद्रेश कुमार महाराज ने वर्तमान पीढ़ी की महत्वाकांक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि आज का युवा डॉक्टर, इंजीनियर, पायलट और प्रशासनिक अधिकारी बनने जैसे बड़े स्वप्न देखता है, जो कि सराहनीय है, परंतु इन लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए पूर्ण निष्ठा के साथ किया गया परिश्रम ही एकमात्र आधार है। उन्होंने एक अत्यंत सूक्ष्म किंतु महत्वपूर्ण तथ्य साझा किया कि लोग प्रायः सफलता प्राप्ति के बाद खुश रहने की शर्त रखते हैं, जबकि वास्तविक प्रसन्नता किसी पद या उपलब्धि की मोहताज नहीं होती। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे सफलता की इस आपाधापी में अपनी आंतरिक शांति और सहज मुस्कान को कभी ओझल न होने दें।
अपने व्यक्तिगत जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए महाराज ने बताया कि वे स्वयं कभी गायक बनने की आकांक्षा लेकर मुंबई गए थे, जहाँ उन्होंने संगीत सीखा और कई ऑडिशन दिए, किंतु नियति ने उनके लिए भक्ति और लोक-कल्याण का मार्ग चुना था। आज वे लोगों को प्रसन्न करने के बजाय ईश्वर की प्रसन्नता के लिए कार्य करते हैं और इसी में उन्हें परम आनंद की अनुभूति होती है। प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान एक छात्र द्वारा मन के नियंत्रण पर पूछे गए प्रश्न का उत्तर देते हुए उन्होंने समझाया कि मन को अनुशासित करने का सर्वोत्तम उपाय उसकी हर तात्कालिक इच्छा की पूर्ति न करना है। उन्होंने विद्यार्थियों को 'कंफर्ट जोन' से बाहर निकलने, नियमित प्राणायाम करने, खान-पान में सुधार लाने और एकाग्रता बढ़ाने के लिए निरंतर अभ्यास करने की व्यावहारिक सलाह दी। कोटा की ऊर्जा से अभिभूत होकर उन्होंने विद्यार्थियों को सकारात्मक दृष्टिकोण और अटूट आत्मविश्वास के साथ भविष्य की ओर कदम बढ़ाने का संदेश दिया।

Pratahkal Bureau
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