कोल्हापुर: सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय में मनाया गया वाचन प्रेरणा दिवस
डॉ. कलाम की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में साहित्यकार प्रा. पी. एस. पाटील ने कथाकथन प्रस्तुत कर पढ़ने की आदत विकसित करने पर जोर दिया।

कोल्हापुर के मुरगूड स्थित सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय में वाचन प्रेरणा दिवस कार्यक्रम के दौरान मंच पर संबोधन देते अतिथि।
कोल्हापुर के मुरगूड स्थित सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय में डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम की जयंती के अवसर पर वाचन प्रेरणा दिवस उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के वाङ्मय मंडल की ओर से आयोजित ‘माझे कथाकथन’ कार्यक्रम में साहित्यकार प्रा. पी. एस. पाटील ने ‘सर्जा-राजा’ कहानी प्रस्तुत कर ग्रामीण जीवन की वास्तविकताओं, किसान परिवार के संघर्ष और मनुष्य-पशु के भावनात्मक संबंधों को प्रभावी ढंग से सामने रखा। उन्होंने कहा कि ‘सर्जा-राजा’ कहानी ग्रामीण जीवन की वास्तविकता को उजागर करती है और इसमें किसान परिवार के संघर्ष का सशक्त चित्रण किया गया है।
प्रा. पी. एस. पाटील ने कहा कि आज प्रतिस्पर्धा के दौर में विद्यार्थियों का ध्यान पढ़ने की आदत से हटता जा रहा है। हालांकि, अपनी अलग पहचान बनाने और रचनात्मक लेखन के लिए पढ़ने की आदत विकसित करना आवश्यक है। उनकी ओर से प्रस्तुत ‘सर्जा-राजा’ कहानी में ग्रामीण जीवन की कठिनाइयों, गरीबी के कारण किसान परिवार को झेलनी पड़ने वाली परेशानियों और मनुष्य तथा पशुओं के बीच भावनात्मक संबंधों को उजागर किया गया। कहानी की यथार्थवादी प्रस्तुति और भावनात्मक प्रसंगों ने उपस्थित श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. शिवाजी होडगे ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने वाचन संस्कृति के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि समाज को सुसंस्कृत बनाने के लिए पढ़ने का कोई विकल्प नहीं है। वर्तमान में पुस्तकालयों में पाठकों की संख्या कम हो रही है। ऐसे में स्कूलों, महाविद्यालयों, विद्यार्थियों और अभिभावकों को वाचन संस्कृति के संरक्षण के लिए आगे आना आवश्यक है। इस अवसर पर डॉ. अर्जुन कुंभार प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
प्रा. विनोदकुमार प्रधान ने अतिथियों का परिचय कराया, जबकि डॉ. सुखदेव एकल ने स्वागत किया। अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रा. डॉ. सौ. एम. एस. पाटील ने प्रस्तावना में कार्यक्रम की पृष्ठभूमि और वाचन प्रेरणा दिवस के उद्देश्य को स्पष्ट किया। डॉ. अशोक पाटील ने आभार व्यक्त किया, जबकि प्रा. अर्चना कांबले ने कार्यक्रम का संचालन किया।
कार्यक्रम में प्रा. दादासाहेब सरदेसाई, प्रा. दीपक साळुंखे, प्रा. एच. एम. सोहणी, प्रा. सोहम डाफळे, प्रा. आर. एस. पाटील, प्रा. नूतन बिरबोळे, प्रा. दिगंबर गोरे, प्रा. सुशांत पाटील, प्रा. संजय हेरवाडे, प्रा. धनाजी खतकर, प्रा. गुरुनाथ सामंत, प्रा. राकेश माने, प्रा. संदीप मोहिते, प्रा. राम पाटील, प्रा. नितेश रायकर, प्रा. अवधूत पाटील, प्रा. राहुल बोटे और डॉ. सोनाली कुंभार सहित महाविद्यालय के विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

Vijay Morbale, Kolhapur
पद: क्षेत्रीय संवाददाता (कोल्हापुर)
शिक्षा: बी.एससी (केमिस्ट्री), ग्रामीण पत्रकारिता एवं जनसंचार में पीजी डिप्लोमा
परिचय:
विजय गुंडू मोरबाळे महाराष्ट्र के कोल्हापुर क्षेत्र के एक समर्पित और अनुभवी जमीनी पत्रकार हैं। शिवाजी विश्वविद्यालय से बी.एससी (केमिस्ट्री) की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर में बदला। उन्होंने शिवाजी विश्वविद्यालय के 'ग्रामीण पत्रकारिता और जनसंचार' कोर्स में सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय (मुरगुड) में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जो ग्रामीण और स्थानीय मुद्दों पर उनकी गहरी समझ को दर्शाता है।
कार्यक्षेत्र और विशेषज्ञता:
विजय मुख्य रूप से कोल्हापुर जिले के कागल, मुरगुड, अदमापुर और भुदरगड जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। 'निकाल न्यूज' जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से स्थानीय पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाने के बाद, अब वे 'प्रातःकाल' (pratahkal.in) के डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हैं। वे स्थानीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, अपराध (क्राइम) और क्षेत्र के ऐतिहासिक व धार्मिक मंदिरों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता से जनता तक पहुँचाते हैं।
पत्रकारिता का दृष्टिकोण:
सकारात्मक और समाजोपयोगी पत्रकारिता में गहरा विश्वास रखने वाले विजय हमेशा उन खबरों को प्राथमिकता देते हैं जो समाज में बदलाव ला सकें। हाल ही में जून 2026 में, एक सेवानिवृत्ति समारोह में हार-फूलों की जगह अनाज इकट्ठा कर जरूरतमंदों को बांटने की एक अनूठी सामाजिक पहल को उन्होंने प्रमुखता से कवर किया था, जिसे काफी सराहना मिली।
ग्रामीण भारत की आवाज और स्थानीय विकास की खबरों को डिजिटल माध्यमों पर मजबूती से रखने के लिए विजय मोरबाळे लगातार प्रयासरत हैं।
