दशहरे पर अवधूत पाटील की अनूठी पहल, आपटा-कांचन वृक्षों के संरक्षण का दिया संदेश
दशहरे पर आपटा की पत्तियां तोड़ने के बजाय पौधे लगाने और वृक्ष पूजन कर पर्यावरण संतुलन बनाए रखने की अपील की गई।

कोल्हापुर के भुदरगढ़ में विजयादशमी पर पर्यावरण मित्र अवधूत पाटील (बाएं) अपनी बेटियों मिथाली, जान्हवी और परिवार के साथ आपटा वृक्ष का पूजन कर प्रकृति संरक्षण का संदेश देते हुए।
कोल्हापुर। विजयादशमी पर सीमोल्लंघन की परंपरा के तहत आपटा के पत्तों को सोना मानकर एक-दूसरे को देने की प्रथा है। हालांकि, इस परंपरा के नाम पर आपटा, कांचन और शमी सहित विभिन्न वृक्षों की शाखाओं और पत्तियों की बड़े पैमाने पर कटाई से पर्यावरण संरक्षण का सवाल गंभीर हो गया है। इस समस्या को रोकने और दुर्लभ औषधीय वृक्षों के संरक्षण के उद्देश्य से खानापुर के पर्यावरण मित्र अवधूत पाटील और उनके परिवार ने दशहरे पर आपटा और कांचन वृक्षों का पूजन कर ‘प्रकृति का संरक्षण ही सच्चा सीमोल्लंघन’ का संदेश दिया।
पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने में वृक्षों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। पेड़ शुद्ध हवा, छाया और आश्रय देने के साथ पर्यावरण का आवश्यक संतुलन बनाए रखते हैं। इसलिए वृक्षों को केवल प्रकृति का एक घटक मानने के बजाय छोटे बच्चों की तरह उनकी देखभाल और परवरिश करना जरूरी है। वृक्षों की कटाई, जंगलों में लगने वाली आग और वनों में मानवीय हस्तक्षेप बढ़ने के कारण वृक्ष संपदा की रक्षा करना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। इस पहल के माध्यम से भी यही विचार सामने रखा गया।
दशहरे के दिन सीमोल्लंघन की परंपरा के अनुसार आपटा के पत्तों को सोना मानकर एक-दूसरे को भेंट किया जाता है। इस परंपरा का सांस्कृतिक महत्व है, लेकिन इसके लिए पेड़ों की शाखाएं काटने और पत्तियां नोचने से बचना आवश्यक है। इसी तरह वृक्षों की कटाई जारी रहने पर आपटा और कांचन जैसे पेड़ों के अस्तित्व पर खतरा पैदा हो सकता है। ऐसे में सांस्कृतिक परंपराओं को बनाए रखते हुए पर्यावरण की रक्षा के लिए समाज को आगे आना जरूरी है।
पर्यावरण मित्र अवधूत पाटील ने दशहरे के पर्व को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए आपटा और कांचन के पौधे लगाने, एक-दूसरे को पत्तियों के बजाय फूल या पौधे भेंट करने और बड़ों का आशीर्वाद लेने की अपील की। उन्होंने संदेश दिया कि त्योहारों और उत्सवों को मनाते समय प्रकृति को नुकसान पहुंचाने से बचना चाहिए। ऐसा करने से पर्यावरण संरक्षण के अभियान को मजबूती मिलेगी।
इस वृक्ष पूजन और जनजागरूकता अभियान में पर्यावरण मित्र अवधूत पाटील, मयुरी पाटील, मिथाली पाटील, जान्हवी पाटील सहित अन्य परिजन शामिल हुए। भुदरगढ़ तालुका में वृक्षारोपण, वृक्षों के संरक्षण और संवर्धन के अभियान को और गति देने के संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इस पहल ने दशहरे की परंपरा को प्रकृति संरक्षण से जोड़ते हुए वृक्षों की रक्षा के प्रति जागरूकता का संदेश दिया।
फोटो: दशहरे के अवसर पर आपटा और कांचन वृक्षों का पूजन कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते पर्यावरण मित्र अवधूत पाटील, मयुरी पाटील, मिथाली पाटील, जान्हवी पाटील और परिवार के सदस्य।

Vijay Morbale, Kolhapur
पद: क्षेत्रीय संवाददाता (कोल्हापुर)
शिक्षा: बी.एससी (केमिस्ट्री), ग्रामीण पत्रकारिता एवं जनसंचार में पीजी डिप्लोमा
परिचय:
विजय गुंडू मोरबाळे महाराष्ट्र के कोल्हापुर क्षेत्र के एक समर्पित और अनुभवी जमीनी पत्रकार हैं। शिवाजी विश्वविद्यालय से बी.एससी (केमिस्ट्री) की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर में बदला। उन्होंने शिवाजी विश्वविद्यालय के 'ग्रामीण पत्रकारिता और जनसंचार' कोर्स में सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय (मुरगुड) में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जो ग्रामीण और स्थानीय मुद्दों पर उनकी गहरी समझ को दर्शाता है।
कार्यक्षेत्र और विशेषज्ञता:
विजय मुख्य रूप से कोल्हापुर जिले के कागल, मुरगुड, अदमापुर और भुदरगड जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। 'निकाल न्यूज' जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से स्थानीय पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाने के बाद, अब वे 'प्रातःकाल' (pratahkal.in) के डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हैं। वे स्थानीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, अपराध (क्राइम) और क्षेत्र के ऐतिहासिक व धार्मिक मंदिरों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता से जनता तक पहुँचाते हैं।
पत्रकारिता का दृष्टिकोण:
सकारात्मक और समाजोपयोगी पत्रकारिता में गहरा विश्वास रखने वाले विजय हमेशा उन खबरों को प्राथमिकता देते हैं जो समाज में बदलाव ला सकें। हाल ही में जून 2026 में, एक सेवानिवृत्ति समारोह में हार-फूलों की जगह अनाज इकट्ठा कर जरूरतमंदों को बांटने की एक अनूठी सामाजिक पहल को उन्होंने प्रमुखता से कवर किया था, जिसे काफी सराहना मिली।
ग्रामीण भारत की आवाज और स्थानीय विकास की खबरों को डिजिटल माध्यमों पर मजबूती से रखने के लिए विजय मोरबाळे लगातार प्रयासरत हैं।
