कागल तालुका सूखाग्रस्त घोषित: खरीफ फसलें बर्बाद, किसानों में रोष
बरसात की लंबी खींचतान से धान और सोयाबीन समेत कई फसलें सूख गईं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों पर आर्थिक संकट गहरा गया है।

कोल्हापुर जिले के कागल तालुका के पश्चिमी हिस्से में बारिश की लंबी खींचतान ने खरीफ सीजन की खेती को भारी नुकसान पहुंचाया है। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के पानी पर निर्भर हजारों हेक्टेयर जमीन पर बोई गई धान, मूंगफली, सोयाबीन और रागी की फसलें सूखकर बर्बाद हो गई हैं। मेहनत से तैयार की गई फसलें हाथ से निकलने के कारण छोटे और सीमांत किसान गंभीर आर्थिक संकट में फंस गए हैं। इस स्थिति को देखते हुए मुरगूड की किसान संगठन ने पूरे कागल तालुका को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग उठाई है।
चिमगांव, ठाणेवाड़ी, बोळावी, जख्खेवाड़ी, बोळावीवाड़ी, हल्दी, बेनिग्रे, करंजिवने, बेलेवाड़ी, कासारी, हासूर सेनापति, कापशी, बाळेघोल, तमणाकवाडा, माद्याळ, हणबरवाड़ी, अर्जुनी, उंदरवाड़ी, सोनाळी, पिराचीवाड़ी, सावर्डे बुद्रुक, सावर्डे खुर्द, चौडाळ, साके, व्हनाळी, केनवडे, गोरंबे, मुरगूड, यमगे, हमीदवाडा, बामणी, शेंडूर और एकोंडी सहित पश्चिमी क्षेत्र के 70 से 80 गांवों के किसानों को बारिश की कमी का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। पहाड़ी ढलानों और असिंचित जमीन पर खड़ी फसलें पूरी तरह झुलस गई हैं। इससे किसानों का आर्थिक गणित पूरी तरह बिगड़ गया है।
तालुका में बारहमासी सिंचाई वाली खेती और पहाड़ी क्षेत्रों की वर्षा आधारित खेती के बीच बड़ा अंतर है। सिंचाई की सुविधा वाले किसानों की तुलना में गुंठा-दो गुंठा जमीन पर खेती करने वाले सीमांत किसानों की मुश्किलें कहीं अधिक बढ़ गई हैं। बढ़ती महंगाई, दिवाली का खर्च, बच्चों की शैक्षणिक फीस और दसवीं-बारहवीं की परीक्षा फीस ने किसान परिवारों की आर्थिक स्थिति को और मुश्किल बना दिया है। किसानों के सामने बच्चों की फीस भरने और घर का खर्च चलाने के बीच चुनाव करने जैसी स्थिति पैदा हो गई है।
खरीफ की फसल हाथ आने के बाद दिवाली के दौरान ग्रामीण बाजारों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं। लेकिन इस वर्ष फसलें बर्बाद होने से मुरगूड, गारगोटी, पूर, केनवडे और वाघापुर के बाजारों में मंदी का माहौल है। किसानों के हाथ में पैसा नहीं होने का असर अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है।
राधानगरी, भुदरगढ़, चंदगढ़, आजरा और गगनबावड़ा तालुकों को सूखाग्रस्त सूची में शामिल किया गया है, जबकि बारिश की कमी के कारण खरीफ फसलों को भारी नुकसान झेलने वाले कागल तालुका को इस सूची से बाहर रखा गया है। इसे लेकर किसानों में नाराजगी है। किसान नेता संदीप भारमल ने सवाल उठाया कि तालुका को सूखाग्रस्त घोषित करने से पहले प्रशासन ने क्या प्रत्येक गांव में वर्षा की स्थिति और फसलों के नुकसान का वास्तविक निरीक्षण किया था?
मुरगूड के हुतात्मा तुकाराम चौक में आयोजित किसान संगठन की बैठक में कागल तालुका की सूखे जैसी स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में मांग की गई कि गांववार फसल नुकसान का निरीक्षण कर पूरे कागल तालुका को सूखाग्रस्त घोषित किया जाए और प्रभावित किसानों को सरकार की ओर से तत्काल राहत प्रदान की जाए।
बैठक में सुरेश सालोखे, राणोजी गोधडे, अमोल मेटकर, संदीप भारमाल, कॉ. अशोक चौगले, चंद्रकांत हलदकर, नामदेव खंडागले, विजय आढाव, राजू भारमाल, गजानन सालोखे, समाधान हेंदळकर, अण्णा कदम, पांडुरंग खंडागले, राजाराम रावण, श्रीमंद महाजन, बबन बाबर, संदीप पाटील, सातापा मेटकर, शशिकांत चौगले, राम सातवेकर, गजानन मोरबाळे, केरबा खंडागले, सचिन मेंडके, सचिन भारमाल, प्रकाश मेंडके, प्रशांत मोरबाळे, गौतम कांबळे, दत्तात्रय लोखंडे, संतोष मेंडके, सुनील परीट, उदय भोसले, राजबा भोसले और संतोष भोसले सहित अन्य उपस्थित थे।
कागल तालुका के 70 से 80 गांवों में खरीफ फसलों की बर्बादी ने किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा कर दिया है। ऐसे में किसान संगठन ने प्रशासन से गांववार नुकसान का आकलन कर पूरे तालुका को सूखाग्रस्त घोषित करने और प्रभावित परिवारों को तत्काल सरकारी राहत देने की मांग की है।

Vijay Morbale, Kolhapur
पद: क्षेत्रीय संवाददाता (कोल्हापुर)
शिक्षा: बी.एससी (केमिस्ट्री), ग्रामीण पत्रकारिता एवं जनसंचार में पीजी डिप्लोमा
परिचय:
विजय गुंडू मोरबाळे महाराष्ट्र के कोल्हापुर क्षेत्र के एक समर्पित और अनुभवी जमीनी पत्रकार हैं। शिवाजी विश्वविद्यालय से बी.एससी (केमिस्ट्री) की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर में बदला। उन्होंने शिवाजी विश्वविद्यालय के 'ग्रामीण पत्रकारिता और जनसंचार' कोर्स में सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय (मुरगुड) में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जो ग्रामीण और स्थानीय मुद्दों पर उनकी गहरी समझ को दर्शाता है।
कार्यक्षेत्र और विशेषज्ञता:
विजय मुख्य रूप से कोल्हापुर जिले के कागल, मुरगुड, अदमापुर और भुदरगड जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। 'निकाल न्यूज' जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से स्थानीय पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाने के बाद, अब वे 'प्रातःकाल' (pratahkal.in) के डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हैं। वे स्थानीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, अपराध (क्राइम) और क्षेत्र के ऐतिहासिक व धार्मिक मंदिरों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता से जनता तक पहुँचाते हैं।
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ग्रामीण भारत की आवाज और स्थानीय विकास की खबरों को डिजिटल माध्यमों पर मजबूती से रखने के लिए विजय मोरबाळे लगातार प्रयासरत हैं।
