महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के भुदरगढ़ तालुका में वन्यजीव सप्ताह के अवसर पर विद्यार्थियों को वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता के महत्व से परिचित कराने के लिए विभिन्न स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। चित्र रंगभरण प्रतियोगिता, निबंध प्रतियोगिता, प्रश्नमंजुषा और वन्यजीव जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को वन्यजीवों के संरक्षण, संवर्धन और उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने का संदेश दिया गया। इन गतिविधियों में विजेताओं को शैक्षणिक सामग्री और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

कोल्हापुर के विजय मोरबाळे के अनुसार, वन्यजीवों का संरक्षण और संवर्धन करने के साथ-साथ पर्यावरण में उनकी भूमिका को विद्यार्थियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से ये कार्यक्रम आयोजित किए गए। वन परिक्षेत्र गारगोटी, सामाजिक वानिकी विभाग गारगोटी और पर्यावरण मित्र अवधूत पाटील के संयुक्त तत्वावधान में भुदरगढ़ तालुका के विभिन्न जिला परिषद, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में ये गतिविधियां संचालित की गईं।

वन्यजीवों के संरक्षण, संवर्धन और उनके प्राकृतिक आवास के संरक्षण के प्रति समाज में जागरूकता पैदा करने के लिए प्रत्येक वर्ष 1 से 7 अक्टूबर तक वन्यजीव सप्ताह मनाया जाता है। वर्ष 1952 से शुरू इस पहल के माध्यम से पर्यावरण में वन्यजीवों के महत्व को रेखांकित किया जाता है। इस वर्ष ‘आवासों को जोड़ें, वन्यजीवों को समृद्ध बनाएं’ की संकल्पना के साथ विभिन्न माध्यमों से वन्यजीव संरक्षण और संवर्धन का संदेश दिया गया।

कम उम्र से ही वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता विकसित करने के उद्देश्य से स्कूली विद्यार्थियों को केंद्र में रखकर विभिन्न प्रतियोगिताओं और जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। चित्र रंगभरण और निबंध प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों ने वन्यजीव संरक्षण के महत्व को प्रस्तुत किया। वहीं, प्रश्नमंजुषा के जरिए वन्यजीवों से संबंधित उनके ज्ञान को परखा गया।

इसके अतिरिक्त, सांपों को लेकर समाज में प्रचलित गलत धारणाओं को दूर करने, पर्यावरण में सांपों की भूमिका समझाने और उनके प्रति उचित दृष्टिकोण विकसित करने के लिए विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक पर्यावरण के संरक्षण के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया।

प्रतियोगिताओं में विजेता विद्यार्थियों को प्रोत्साहन स्वरूप शैक्षणिक सामग्री और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। आयोजकों के अनुसार, इन कार्यक्रमों से विद्यार्थियों में वन्यजीवों के प्रति जिज्ञासा बढ़ाने के साथ-साथ प्रकृति और जैव विविधता के संरक्षण के प्रति जागरूकता विकसित करने में मदद मिली।

कोल्हापुर के उप वन संरक्षक धैर्यशील पाटील, सहायक वन संरक्षक श्री काले और सामाजिक वानिकी विभाग की सहायक वन संरक्षक स्नेहल मगर के मार्गदर्शन में विभिन्न विद्यालयों में ये कार्यक्रम आयोजित किए गए।

इस अवसर पर सामाजिक वानिकी के वन क्षेत्रपाल नितीन खताल, प्रादेशिक वन क्षेत्रपाल अविनाश तायनाक, वनपाल राजेंद्र बरगे, मधुकर काशिद, स्नेहल सावंत, पर्यावरण मित्र अवधूत पाटील, जान्हवी पाटील, वनरक्षक संतोष गोजारे, एस. बी. तांबेकर, संजय चौगुले, नितीन शिंदे, उत्तम कांबळे, मारुती कांबळे, सारिका बेडगे, निकिता चाळस, वर्षा लोंढे और श्रीमती सुषमा सरवदे सहित विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थी, शिक्षक और अभिभावक उपस्थित रहे।

कार्यक्रमों का आयोजन पर्यावरण मित्र अवधूत पाटील ने किया। इन गतिविधियों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि वन्यजीवों का संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी महत्वपूर्ण है। भुदरगढ़ में आयोजित इन कार्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता के प्रति जागरूकता को व्यापक बनाना रहा।

Vijay Morbale, Kolhapur

Vijay Morbale, Kolhapur

पद: क्षेत्रीय संवाददाता (कोल्हापुर)

शिक्षा: बी.एससी (केमिस्ट्री), ग्रामीण पत्रकारिता एवं जनसंचार में पीजी डिप्लोमा

परिचय:

विजय गुंडू मोरबाळे महाराष्ट्र के कोल्हापुर क्षेत्र के एक समर्पित और अनुभवी जमीनी पत्रकार हैं। शिवाजी विश्वविद्यालय से बी.एससी (केमिस्ट्री) की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर में बदला। उन्होंने शिवाजी विश्वविद्यालय के 'ग्रामीण पत्रकारिता और जनसंचार' कोर्स में सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय (मुरगुड) में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जो ग्रामीण और स्थानीय मुद्दों पर उनकी गहरी समझ को दर्शाता है।

कार्यक्षेत्र और विशेषज्ञता:

विजय मुख्य रूप से कोल्हापुर जिले के कागल, मुरगुड, अदमापुर और भुदरगड जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। 'निकाल न्यूज' जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से स्थानीय पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाने के बाद, अब वे 'प्रातःकाल' (pratahkal.in) के डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हैं। वे स्थानीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, अपराध (क्राइम) और क्षेत्र के ऐतिहासिक व धार्मिक मंदिरों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता से जनता तक पहुँचाते हैं।

पत्रकारिता का दृष्टिकोण:

सकारात्मक और समाजोपयोगी पत्रकारिता में गहरा विश्वास रखने वाले विजय हमेशा उन खबरों को प्राथमिकता देते हैं जो समाज में बदलाव ला सकें। हाल ही में जून 2026 में, एक सेवानिवृत्ति समारोह में हार-फूलों की जगह अनाज इकट्ठा कर जरूरतमंदों को बांटने की एक अनूठी सामाजिक पहल को उन्होंने प्रमुखता से कवर किया था, जिसे काफी सराहना मिली।

ग्रामीण भारत की आवाज और स्थानीय विकास की खबरों को डिजिटल माध्यमों पर मजबूती से रखने के लिए विजय मोरबाळे लगातार प्रयासरत हैं।

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