करौली। जब हवाओं में 'वंदे मातरम्' के स्वर घुलते हैं, तो वह केवल शब्द नहीं रह जाते, बल्कि स्वाधीनता संग्राम के उन अमर बलिदानों की जीवंत गाथा बन जाते हैं जिसने भारत की नियति बदली। राजस्थान के करौली जिले में रविवार को कुछ ऐसा ही दृश्य जीवंत हो उठा, जब राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' के रचनाकाल के 150 वर्ष पूर्ण होने के ऐतिहासिक अवसर पर समूचा जिला देशभक्ति के रंगों में सराबोर नजर आया। राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप आयोजित इस भव्य जिला स्तरीय प्रदर्शनी का शुभारंभ जिला कलेक्टर नीलाभ सक्सेना ने सूचना केंद्र टाउन हॉल में फीता काटकर किया। इस गरिमामयी आयोजन ने न केवल इतिहास के पन्नों को पलटा, बल्कि वर्तमान पीढ़ी के भीतर राष्ट्रवाद की एक नई चेतना का संचार भी किया।

प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए जिला कलेक्टर नीलाभ सक्सेना ने अत्यंत भावुक और ओजस्वी शब्दों में कहा कि वंदे मातरम् महज एक गीत नहीं, अपितु यह भारत की आत्मा, हमारे स्वतंत्रता संग्राम की प्रखर चेतना और राष्ट्रीय एकता का शाश्वत प्रतीक है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इस गीत ने उस दौर में मातृभूमि के प्रति ऐसा अनुराग जगाया था कि असंख्य वीरों ने हंसते-हंसते फांसी के फंदों को चूम लिया। कलेक्टर ने उपस्थित जनसमूह, विशेषकर युवाओं और विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे इस बलिदानी परंपरा से प्रेरणा लें और राष्ट्रप्रेम, कर्तव्यनिष्ठा एवं सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे मूल्यों को अपने जीवन के मूल संस्कार के रूप में आत्मसात करें। उनके अनुसार, यह प्रदर्शनी उस गौरवशाली अतीत को दृश्य रूप में नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम है, जिससे उनमें देश के प्रति जिम्मेदारी और गर्व की भावना और अधिक प्रगाढ़ होगी।





सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय के सहायक निदेशक धर्मेंद्र कुमार मीणा ने आयोजन की विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि प्रदर्शनी में वंदे मातरम् की रचना प्रक्रिया, इसके ऐतिहासिक कालखंड, स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी निर्णायक भूमिका और महान स्वतंत्रता सेनानियों के विचारों को दुर्लभ चित्रों और प्रमाणिक जानकारियों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। इस दौरान टाउन हॉल परिसर उस समय और भी अधिक ऊर्जामय हो गया जब राजस्थान पुलिस की बैंड वादन टुकड़ी ने 'वंदे मातरम्' और 'सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा' की धुनों से वातावरण को गुंजायमान कर दिया। इस सुरीली और देशभक्तिपूर्ण प्रस्तुति ने वहां मौजूद हर अधिकारी और नागरिक के भीतर गौरव की लहर दौड़ा दी।

इस महत्वपूर्ण अवसर पर प्रशासनिक तंत्र की सक्रिय भागीदारी भी देखने को मिली। कार्यक्रम में अतिरिक्त जिला कलक्टर हेमराज परिड़वाल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गुमनाराम, मुख्य कार्यकारी अधिकारी शिवचरण मीणा, उपखण्ड अधिकारी हेमराज मीना, सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी धर्मेन्द्र मीना और चुनाव शाखा के प्रभारी विश्वास शर्मा सहित कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। इस आयोजन ने सिद्ध कर दिया कि समय भले ही बीत जाए, लेकिन 'वंदे मातरम्' जैसे मंत्र आज भी भारत की एकता और अखंडता को अक्षुण्ण बनाए रखने की उतनी ही शक्ति रखते हैं जितनी कि डेढ़ सदी पहले। यह प्रदर्शनी केवल एक सरकारी आयोजन न रहकर करौली के जन-मन में राष्ट्रभक्ति का संचार करने वाला एक महोत्सव बन गई।

Rajendra Kumbhakar, Karauli

Rajendra Kumbhakar, Karauli

नाम: राजेन्द्र प्रसाद कुम्भाकर

वर्तमान पद: करौली जिला रिपोर्टर (प्रातःकाल)

कार्यक्षेत्र: करौली जिला मुख्यालय, हिण्डौन सिटी, सपोटरा, टोडाभीम, और मंडरायल (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): प्रशासनिक खबरें, राजनीति, क्राइम, स्वास्थ्य, और शिक्षा

परिचय 

राजेन्द्र प्रसाद कुंभकार राजस्थान के करौली जिले के जिला रिपोर्टर हैं। वह पिछले 6 महीने से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं। वह मुख्य रूप से करौली जिला मुख्यालय की प्रशासनिक खबरों के साथ-साथ पूरे जिले के अंतर्गत आने वाले हिण्डौन सिटी, सपोटरा, टोडाभीम और मंडरायल क्षेत्रों की राजनीतिक, आपराधिक, स्वास्थ्य और शैक्षणिक गतिविधियों को कवर करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 वर्ष का अनुभव । 'प्रातःकाल' से जुड़ने से पहले वह निम्नलिखित मीडिया संस्थानों, डिजिटल ऐप्स और समाचार पत्रों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं:

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शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने अपनी शिक्षा में स्नातक (Graduation) की डिग्री हासिल की है।

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