चिकित्सा संस्थानों में 10 मई तक मनाया जाएगा फायर सेफ्टी सप्ताह
सीएमएचओ डॉ. सतीश चंद मीना के निर्देश पर अस्पतालों में मॉक ड्रिल के जरिए अग्नि सुरक्षा मानकों और आपदा प्रबंधन की तैयारी परखी जा रही है।

जिले के एक चिकित्सा संस्थान में फायर सेफ्टी सप्ताह के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों को आग बुझाने और आपातकालीन सुरक्षा उपायों का प्रशिक्षण देते विशेषज्ञ।
जिले में आगजनी की घटनाओं की रोकथाम, सुरक्षा संबंधी जानकारी के विस्तार, बेहतर तैयारी और अग्नि सुरक्षा मानकों के पालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से फायर सेफ्टी सप्ताह का आयोजन 10 मई तक किया जाएगा। इस दौरान “आगजनिक की रोकथाम के लिए एक साथ” थीम पर विभिन्न गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है, जिसके तहत चिकित्सा संस्थानों में जन समुदाय को फायर सेफ्टी के प्रति जागरूक करने का व्यापक अभियान चलाया जा रहा है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. सतीश चंद मीना ने जानकारी देते हुए बताया कि जन समुदाय में अग्नि सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए राजकीय एवं निजी चिकित्सा संस्थानों में मॉक ड्रिल आयोजित की जा रही हैं, जिनके माध्यम से अग्नि सुरक्षा तैयारियों की वास्तविक स्थिति की परख की जा रही है। इसके लिए सभी चिकित्सा संस्थान प्रभारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
सीएमएचओ ने स्पष्ट किया कि अस्पतालों, क्लीनिकों एवं अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में अग्नि सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी कार्मिकों को निर्देशित किया कि वे अग्नि सुरक्षा मानकों का पूर्ण रूप से पालन सुनिश्चित करें तथा किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सदैव तैयार रहें। उन्होंने यह भी कहा कि अग्नि सुरक्षा उपकरणों की कार्यक्षमता को मॉक ड्रिल के माध्यम से समय-समय पर जांचा-परखा जाए।
उन्होंने बताया कि जिन चिकित्सा संस्थानों में फायर सेफ्टी संबंधी गतिविधियां नहीं की जाएंगी, वहां कार्यालय स्तर से टीमें गठित कर निरीक्षण कराया जाएगा। इन निरीक्षणों में अग्निशमन उपकरण, फायर अलार्म सिस्टम, आपातकालीन निकास मार्ग, विद्युत सुरक्षा व्यवस्था तथा आपदा प्रबंधन तैयारियों की गहन जांच की जाएगी। संस्थानों में कमियां पाए जाने पर जनहित को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।
सीएमएचओ डॉ. मीना ने यह भी कहा कि गर्मी के मौसम में आगजनी की घटनाओं का खतरा अधिक रहता है, ऐसे में प्रत्येक अस्पताल कर्मी का फायर सेफ्टी एवं आपदा प्रबंधन के प्रति प्रशिक्षित होना अनिवार्य है। उन्होंने कर्मचारियों को फायर एक्सटिंग्विशर के उपयोग, आपातकालीन निकासी प्रक्रिया, फायर एग्जिट प्लान तथा मरीजों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की प्रक्रिया की पूरी जानकारी रखने पर बल दिया।
इस अभियान के तहत जिले के सभी चिकित्सा संस्थानों में सुरक्षा मानकों की समीक्षा और तैयारियों की परख के माध्यम से आपदा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे किसी भी संभावित आगजनी की स्थिति में जनहानि को न्यूनतम किया जा सके।

Rajendra Kumbhakar, Karauli
वर्तमान पद: करौली जिला रिपोर्टर (प्रातःकाल)
कार्यक्षेत्र: करौली जिला मुख्यालय, हिण्डौन सिटी, सपोटरा, टोडाभीम, और मंडरायल (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): प्रशासनिक खबरें, राजनीति, क्राइम, स्वास्थ्य, और शिक्षा
परिचय
राजेन्द्र प्रसाद कुंभकार राजस्थान के करौली जिले के जिला रिपोर्टर हैं। वह पिछले 6 महीने से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं। वह मुख्य रूप से करौली जिला मुख्यालय की प्रशासनिक खबरों के साथ-साथ पूरे जिले के अंतर्गत आने वाले हिण्डौन सिटी, सपोटरा, टोडाभीम और मंडरायल क्षेत्रों की राजनीतिक, आपराधिक, स्वास्थ्य और शैक्षणिक गतिविधियों को कवर करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 वर्ष का अनुभव । 'प्रातःकाल' से जुड़ने से पहले वह निम्नलिखित मीडिया संस्थानों, डिजिटल ऐप्स और समाचार पत्रों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं:
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उन्होंने अपनी शिक्षा में स्नातक (Graduation) की डिग्री हासिल की है।
