नकली रिफाइंड तेल के संदेह से मचा हड़कंप: ग्रामीणों की शिकायत पर खाद्य विभाग ने लिया सैंपल, जांच के लिए भेजा लैब
करौली जिले के काछीपुरा गांव में भंडारे के लिए खरीदे गए ‘सोना सिक्का’ रिफाइंड तेल पर नकली होने का संदेह गहराया। ग्रामीणों की शिकायत के बाद खाद्य विभाग ने सैंपल लेकर जांच शुरू कर दी है, अब सभी की नजर लैब रिपोर्ट पर है।

मासलपुर के काछीपुरा गांव में भंडारे के लिए लाए गए संदिग्ध रिफाइंड तेल के पीपे जिन्हें खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने ग्रामीणों की शिकायत के बाद जांच के लिए जब्त किया है।
जिले में खाद्य पदार्थों में मिलावट और नकली उत्पादों की बढ़ती आशंकाओं के बीच मंगलवार को पंचायत समिति मासलपुर के काछीपुरा गांव से जुड़ा एक मामला सामने आया, जिसने खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। भागवत कथा के समापन अवसर पर आयोजित भंडारे के लिए खरीदे गए रिफाइंड तेल को लेकर ग्रामीणों ने नकली होने का संदेह जताते हुए जमकर विरोध प्रदर्शन किया और खाद्य सुरक्षा विभाग से कार्रवाई की मांग की।
जानकारी के अनुसार, काछीपुरा गांव में आयोजित भंडारे के लिए हिंडौन सिटी के टीकाकुंड बयाना रोड स्थित एक थोक विक्रेता फर्म से ‘सोना सिक्का’ ब्रांड के 100 पीपे रिफाइंड तेल खरीदे गए थे। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें ब्रांडेड तेल के नाम पर संदिग्ध और संभवतः नकली उत्पाद उपलब्ध कराया गया।
मामला उस समय तूल पकड़ गया जब आयोजन समिति से जुड़े लोगों ने रिफाइंड तेल के पैकेजिंग में कई विसंगतियां देखीं। ग्रामीणों के अनुसार, पीपों के बाहरी गत्ते पर ‘एस ओ एन ए’ अंकित था, जबकि अंदर मौजूद पीपों पर ‘एस ओ एन ए ए’ लिखा हुआ पाया गया। इसके अलावा बाहरी रैपर पर ‘सिंस 1984’ अंकित था, जबकि पीपों पर ‘1894’ लिखा हुआ दिखाई दिया। इन विरोधाभासों के चलते ग्रामीणों को उत्पाद की प्रामाणिकता पर संदेह हुआ।
घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण संदिग्ध रिफाइंड तेल के पीपे लेकर बयाना रोड स्थित दुकान पर पहुंचे, जहां स्थिति तनावपूर्ण हो गई। सूचना पर कोतवाली थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया।
आयोजन समिति के सदस्य दिनेश सैनी ने बताया कि 18 जून को भंडारे की प्रसादी के लिए चीनी, घी, चना दाल, पोहा, चावल सहित कुल 3 लाख 37 हजार 309 रुपये की सामग्री खरीदी गई थी। इसमें लगभग 3 लाख रुपये मूल्य के 100 पीपे रिफाइंड तेल शामिल थे।
ग्रामीणों की शिकायत के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी। खाद्य सुरक्षा विभाग, करौली के अधिकारी विजय सिंह ने बताया कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) को प्राप्त शिकायत के निर्देश पर विभागीय टीम मौके पर पहुंची। जांच के दौरान एक पिकअप वाहन में रखे करीब 90 पीपे रिफाइंड तेल में गड़बड़ी पाए जाने की आशंका के आधार पर कार्रवाई की गई।
विभाग ने एक पीपे को नमूने के रूप में जब्त कर लिया है, जिसे गुणवत्ता और प्रामाणिकता की जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, फिलहाल यह पुष्टि नहीं हो सकी है कि संबंधित रिफाइंड तेल के सभी पीपे उसी दुकान से खरीदे गए थे, जहां ग्रामीण शिकायत लेकर पहुंचे थे।
अब पूरे मामले की निगाहें प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह स्पष्ट करेगी कि भंडारे में उपयोग के लिए खरीदा गया रिफाइंड तेल वास्तव में मानकों के अनुरूप था या फिर ग्रामीणों का संदेह सही साबित होता है। खाद्य सुरक्षा से जुड़े इस प्रकरण ने एक बार फिर बाजार में बिक रहे खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

Pratahkal Bureau
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