करौली जिले में गुरुवार का दिन चिकित्सा व्यवस्था की पारदर्शिता के लिए निर्णायक साबित हुआ, जब मरीजों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे झोलाछापों पर आखिरकार शिकंजा कस गया। सीएमएचओ डॉ. जयंतीलाल मीना ने मामचारी, मनोहरपुर और राजौर क्षेत्रों में औचक निरीक्षण के दौरान तीन व्यक्तियों को मेडिकल दुकान के नाम पर बिना किसी दस्तावेज के इलाज करते हुए पकड़ा, जिससे विभाग में हड़कंप मच गया।

निरीक्षण के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि इन संचालकों के पास न तो मेडिकल स्टोर चलाने का वैध प्राधिकरण था और न ही मरीजों का उपचार करने के लिए किसी प्रकार की योग्यता। सीएमएचओ ने तत्काल प्रभाव से तीनों को दुकानें बंद करने के निर्देश दिए और स्पष्ट किया कि इनके खिलाफ क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2010 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि झोलाछापों की वजह से मरीजों की जान जोखिम में पड़ती है, इसलिए विभाग इस प्रकार की गतिविधियों पर शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाए हुए है।

इसी दौरान पीएचसी महोली का निरीक्षण भी किया गया, जहां व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दिए गए। विभागीय टीम ने साफ किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते अवैध इलाज के मामलों पर लगातार निगरानी रखी जाएगी और आवश्यक होने पर कानूनी कार्रवाई को और तेज किया जाएगा।

करौली जिले में हुई इस कार्रवाई ने संकेत दे दिए हैं कि अवैध चिकित्सा प्रथाओं के खिलाफ अब सख्त कदम उठाए जाएंगे और स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए प्रशासन किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगा।

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