करौली, 11 नवंबर।

महिलाओं के सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल की दिशा में कदम बढ़ाते हुए जिला प्रशासन करौली एवं एक्शनएड एसोसिएशन इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में ग्राम पंचायत डांडा मासलपुर और जोड़ली (सपोटरा) में समुदाय और महिला श्रमिकों के साथ जागरूकता बैठक आयोजित की गई। यह आयोजन एक्शनएड की क्षेत्रीय प्रबंधक सिओन किंगोरी के मार्गदर्शन में किया गया, जिसका उद्देश्य महिलाओं को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से सुरक्षा देने वाले पोश अधिनियम 2013 (कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न रोकथाम, निषेध और निवारण अधिनियम) के बारे में जानकारी देना और उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करना था।

कार्यक्रम के दौरान एक्शनएड के जिला समन्वयक दिनेश कुमार बैरवा ने बताया कि संगठन द्वारा पूरे देश में राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत महिला श्रमिकों को यह समझाया जा रहा है कि कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार के यौन उत्पीड़न की स्थिति में वे किस प्रकार और कहाँ शिकायत दर्ज कर सकती हैं। उन्होंने बताया कि महिलाएँ स्थानीय शिकायत समिति, निकटतम पुलिस थाना, राष्ट्रीय एवं राज्य महिला आयोग की वेबसाइट या SHe-Box पोर्टल पर शिकायत कर सकती हैं।

बैरवा ने विस्तार से बताया कि पोश अधिनियम का उद्देश्य महिलाओं को कार्यस्थल पर सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना है, जहाँ वे बिना भय के अपने कार्यों का निर्वहन कर सकें। इस अधिनियम में यौन उत्पीड़न को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है, जिसमें अवांछित शारीरिक संपर्क, यौन अनुग्रह की मांग, अश्लील साहित्य दिखाना या किसी भी प्रकार का यौन प्रकृति का अनुचित व्यवहार शामिल है।

उन्होंने कहा कि ईंट भट्टों, भवन निर्माण, सड़क निर्माण, सफाई कार्य और घरेलू कामकाज में संलग्न महिला श्रमिक प्रायः असंगठित क्षेत्र से जुड़ी होती हैं, जहाँ उत्पीड़न की संभावना अधिक रहती है। ऐसे में आवश्यक है कि महिलाएँ अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हों और किसी भी प्रकार के उत्पीड़न पर तुरंत आवाज उठाएँ। उन्होंने बताया कि सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थानों में आंतरिक शिकायत समितियों के साथ-साथ असंगठित क्षेत्र के लिए जिला स्तरीय स्थानीय शिकायत समितियाँ गठित की गई हैं, जहाँ शिकायतें दर्ज की जा सकती हैं।

कार्यक्रम के दौरान जोड़ली (सपोटरा) में कोरो फैलो स्वयंसेवक रामराज बैरवा और डांडा मासलपुर में रामराज गुर्जर ने भी महिला श्रमिकों से संवाद किया। उन्होंने उन्हें उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने और शीघ्र शिकायत दर्ज करवाने की सलाह दी। साथ ही बच्चों को शिक्षा से जोड़ने और सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी दी। बैठक के अंत में समुदाय की स्थानीय समस्याओं को चिह्नित किया गया, जिन्हें प्रशासन के समक्ष रखकर समाधान की दिशा में कार्य करने का निर्णय लिया गया।

इस कार्यक्रम ने न केवल महिला श्रमिकों में अपने अधिकारों के प्रति नई चेतना जगाई, बल्कि समाज में लैंगिक समानता और सम्मानजनक कार्यसंस्कृति की दिशा में एक मजबूत संदेश भी दिया।

Pratahkal Bureau

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