राजस्थान राज्य के 10 बड़े पशु मेलों में से करौली जिले का एक रियासतकालीन शिवरात्रि पशु मेले का विधिवत उद्घाटन हो गया है। यह मेला 8 फरवरी तक चलेगा।


भव्य उद्घाटन और अतिथि

  • मेले का उद्घाटन करौली विधायक दर्शन सिंह गुर्जर, एडीएम हेमराज परिड़वाल, अतिरिक्त निदेशक पशुपालन विभाग डॉ. खुशीराम व संयुक्त निदेशक गंगासहाय मीणा ने मंत्रोच्चार, पूजा अर्चना व ध्वजारोहण के साथ किया।
  • इस अवसर पर पशुपालन विभाग के अधिकारी व गणमान्य लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

चुनौतियां और सुझाव

हालांकि, बीते कुछ सालों में पशु मेले की रौनक में कमी आई है और लगातार पशुपालकों की संख्या घटी है, जिससे मेला समय से पहले ही समाप्त होने लगा है। एडीएम परिड़वाल व विधायक गुर्जर ने मेले में आने वाले पशुओं की संख्या बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने करौली में ऊंट सफारी शुरू करने और अन्य उपयोगी पशुओं की संख्या बढ़ाने का सुझाव दिया।


मेले का इतिहास और बदलता स्वरूप

गौरतलब है कि करौली में शिवरात्रि पशु मेले का आयोजन पशुपालन विभाग द्वारा वर्ष 1964 से लगातार किया जा रहा है। पहले यह मेला मुख्य रूप से गोवंश, विशेषकर बैलों के लिए आयोजित होता था। राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों से पशुपालक यहां पहुंचते थे।

अब समय के साथ गोवंश और बैलों की संख्या नगण्य हो गई है, और मेले में सर्वाधिक संख्या में ऊंट पहुंचते हैं। मशीनीकरण, बढ़ते नियम-कायदों और आधुनिकीकरण का प्रभाव मेले पर पड़ा है। यह मेला, जो कभी गोवंश के व्यापार के लिए जाना जाता था, अब अपनी पहचान खोने लगा है और इसमें ऊंट, भैंस और बकरियां अधिक संख्या में पहुंच रही हैं। पशुपालन विभाग मेले में पशुओं के लिए चारा, पानी और चिकित्सा सहित अन्य व्यवस्थाएं करता है।


विधायक का संदेश

"मेले के आयोजन से सामाजिक सौहार्द और मेलजोल बढ़ता है, जिससे समाज में एकता आती है और रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं।" — विधायक दर्शन सिंह गुर्जर

Pratahkal Bureau

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