करौली। राजस्थान के करौली में राष्ट्रीय राजमार्ग-23 के प्रस्तावित बाईपास के नवीन सर्वे ने स्थानीय निवासियों की रातों की नींद उड़ा दी है। मंडरायल रोड क्षेत्र की दर्जनों कॉलोनियों के प्रभावित महिला-पुरुषों ने लामबंद होकर जिला मुख्यालय पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर इस सर्वे को तत्काल निरस्त करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि प्रशासन इस सर्वे को घनी आबादी से हटाकर करीब 200 मीटर दक्षिण दिशा में स्थित खाली सरकारी भूमि से स्थानांतरित करे, ताकि सैकड़ों परिवारों के सिर से छत न छीने।

घटनाक्रम के अनुसार, वर्तमान नवीन सर्वे के मार्ग में श्याम नगर, आदित्य नगर, मां वैष्णो नगर, लक्ष्मण विहार, कृष्णा कॉलोनी, गौतम बुद्ध नगर, सहारियान का पुरा और दुर्गसी घाटा जैसे सघन आबादी वाले क्षेत्र आ रहे हैं। इस प्रस्तावित मार्ग के कारण करीब 150 से 200 पक्के मकानों के ध्वस्त होने और हजारों बीघा खातेदारी भूमि के प्रभावित होने की गंभीर आशंका उत्पन्न हो गई है। ज्ञापन में इस बात का विशेष उल्लेख किया गया है कि यदि सर्वे नहीं बदला गया तो गौतम बुद्ध विहार, हनुमान मंदिर, शिव मंदिर, देवनारायण मंदिर जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल और एक राजकीय प्राथमिक विद्यालय भी जमींदोज हो जाएंगे।

स्थानीय निवासियों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ भूमाफियाओं और कॉलोनाइजरों को अनुचित लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से सर्वे के मूल स्वरूप को जानबूझकर आबादी क्षेत्र की ओर मोड़ा गया है। प्रभावित लोगों ने तथ्यों का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2005 और 2013 के मास्टर प्लान में बाईपास का मार्ग दक्षिण दिशा में स्थित खाली सरकारी भूमि से प्रस्तावित था, जो हर दृष्टि से उपयुक्त था। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि सर्वे को पुराने प्रस्तावित मार्ग पर पुनः स्थानांतरित नहीं किया गया और गरीब परिवारों के मकानों व धार्मिक स्थलों को सुरक्षा प्रदान नहीं की गई, तो आगामी दिनों में यह आंदोलन और अधिक उग्र रूप धारण करेगा।

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