करौली, 11 नवम्बर।

ठंड का मौसम शुरू होते ही छोटे बच्चों में निमोनिया का खतरा तेजी से बढ़ने लगता है। यह संक्रमण न केवल शिशुओं के लिए बल्कि बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों के लिए भी घातक साबित हो सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग 12 नवंबर से 28 फरवरी तक जिलेभर में “सांस अभियान” चलाने जा रहा है, जिसके तहत निमोनिया की रोकथाम, बचाव और उपचार को लेकर व्यापक जनजागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जयंतीलाल मीणा ने बताया कि पांच वर्ष तक की उम्र के बच्चों में निमोनिया एवं उससे होने वाली जटिलताओं के कारण मृत्यु दर चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि नवजात शिशु, कुपोषित बच्चे, एचआईवी संक्रमित व्यक्ति, अत्यधिक शराब व धूम्रपान करने वाले, भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोग तथा हृदय, लीवर या किडनी के पुराने मरीजों को इस बीमारी का खतरा अधिक रहता है।

डॉ. मीणा ने बताया कि निमोनिया फेफड़ों में होने वाला संक्रमण है, जो विभिन्न बैक्टीरिया और वायरस के माध्यम से फैलता है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से ये जीवाणु हवा में फैल जाते हैं और सांस के जरिए स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर संक्रमण का कारण बनते हैं। विश्व स्तर पर पुरुषों और बच्चों में मृत्यु के प्रमुख कारणों में निमोनिया शामिल है।

उन्होंने बताया कि बुखार के साथ तेज खांसी, सांस लेने में कठिनाई, बदन दर्द, छाती में दर्द या खांसी के दौरान खून आना निमोनिया के मुख्य लक्षण हैं। विशेष रूप से पांच वर्ष तक के बच्चों में यदि ये लक्षण दिखाई दें तो माता-पिता को तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

सीएमएचओ ने जिले के सभी बीसीएमओ और चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे निमोनिया से बचाव के लिए जनजागरूकता बढ़ाएं और समय पर उपचार सुनिश्चित करें, ताकि किसी भी बच्चे की जान इस रोकी जा सकने वाली बीमारी से न जाए।

Pratahkal Bureau

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