नांगल शेरपुर: दबंगों ने रोका तलाई का पानी, 500 घरों पर मंडराया जलमग्न होने का खतरा
करौली के नांगल शेरपुर में दबंगों की मनमानी से प्राचीन तलाई का अस्तित्व खतरे में है। पानी निकासी का रास्ता बंद होने से 500 घरों पर जलभराव का संकट मंडरा रहा है। क्या प्रशासन समय रहते गांव को डूबने से बचा पाएगा?

करौली जिले के नांगल शेरपुर में सार्वजनिक बालाजी तलाई पर अतिक्रमण के कारण पानी निकासी बाधित है, जिससे आगामी मानसून में ग्रामीणों को बाढ़ का डर सता रहा है।
करौली जिले के टोडाभीम उपखंड अंतर्गत बालघाट तहसील के राजस्व गांव नांगल शेरपुर में सार्वजनिक बालाजी तलाई पर अतिक्रमण का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। गांव के खसरा नंबर 1488 और 1490 पर स्थित इस प्राचीन जल स्रोत में बरसात के पानी की आवक का प्राकृतिक मार्ग दबंगों द्वारा अवरुद्ध किए जाने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, दबंगों ने मिट्टी डालकर तलाई के पेट में अतिक्रमण कर लिया है और पानी निकासी के लिए बनी पुलिया को बंद कर दिया है। इस स्थिति के चलते अभी से मुख्य सड़क के पास जलभराव की समस्या उत्पन्न हो गई है, जिससे आगामी मानसून के दौरान गांव के करीब 500 घरों के डूबने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
सामाजिक कार्यकर्ता हरि ठेकेदार, गजराज भारती, धर्म सिंह फौजी और राम खिलाड़ी मास्टर ने इस प्राचीन जल स्रोत के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि यह तलाई न केवल भू-जल स्तर को रिचार्ज करने का प्रमुख साधन है, बल्कि गांव की आधी से अधिक आबादी और बेजुबान पशु-पक्षियों की प्यास बुझाने का एकमात्र प्राकृतिक जरिया भी है। ग्रामीणों ने यह भी याद दिलाया कि पिछले वर्ष भी इसी तरह पुलिया बंद किए जाने से गांव में बाढ़ जैसे हालात बन गए थे, जिसके बाद संभागीय आयुक्त के सख्त निर्देश पर प्रशासन को हस्तक्षेप कर पानी की निकासी करवानी पड़ी थी। ग्रामीणों का आरोप है कि इस बार भी समय रहते प्रशासनिक सुध न लेने से स्थिति भयावह हो सकती है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जब इस संबंध में ग्राम विकास अधिकारी रामबाबू सिंह से बात की गई, तो उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें सार्वजनिक तलाई के मार्ग को अवरुद्ध किए जाने की जानकारी प्राप्त हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन इस समस्या के प्रति सजग है और पुलिस के सहयोग से बंद की गई पुलिया को जल्द खुलवाया जाएगा ताकि मानसून सीजन में ग्रामीणों को किसी भी प्रकार की आपदा या परेशानी का सामना न करना पड़े। स्थानीय लोगों की अब प्रशासन से यही अपेक्षा है कि वे केवल आश्वासन ही न दें, बल्कि त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित कर प्राचीन जल स्रोत और गांव को सुरक्षित करें।

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