करौली जिले के उपखंड हिण्डौन सिटी के समीपवर्ती राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय रेवई में 04 फरवरी 2026 को घटित एक अत्यंत पीड़ादायक और चिंताजनक घटना ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। जिस विद्यालय को ज्ञान, संस्कार और सुरक्षा का मंदिर माना जाता है, उसी परिसर में रील बनाने के जुनून ने दो मासूम बच्चों की जिंदगी को खतरे में डाल दिया।


घटना का विवरण: रील और थार का जानलेवा मेल

प्राप्त जानकारी के अनुसार विद्यालय परिसर में थार गाड़ी से रील बनाते समय अध्यापिका अदिति शर्मा द्वारा लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाया गया, जिससे दो निर्दोष बच्चे गाड़ी की चपेट में आ गए। यह कोई साधारण दुर्घटना नहीं, बल्कि घोर गैर-जिम्मेदाराना और आपराधिक लापरवाही का परिणाम है। आज वे बच्चे जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं और पूरा परिवार गहरे सदमे में है।


शिक्षा व्यवस्था और प्रशासन पर गंभीर सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या शिक्षा के मंदिर में इस तरह की गैर-शैक्षणिक और जोखिम भरी गतिविधियों की अनुमति दी जा सकती है? जिन अध्यापकों पर अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा और भविष्य सौंपते हैं, यदि वही शिक्षक सोशल मीडिया की रील के जनून के चक्कर में बच्चों की जान से खिलवाड़ करें, तो यह न केवल शिक्षा व्यवस्था पर सवाल है बल्कि पूरे जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न है।

विद्यालय परिसर में वाहन का इस तरह उपयोग, वह भी रील बनाने जैसी गतिविधि के लिए, स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन है। यह घटना दर्शाती है कि विद्यालयों में अनुशासन, निगरानी और जवाबदेही कितनी कमजोर हो चुकी है। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसी घटनाएं भविष्य में और भी भयावह रूप ले सकती हैं।


ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों की प्रमुख मांगें

इस गंभीर घटना के मद्देनज़र ग्रामीणों व सामाजिक संगठनों ने निम्नलिखित मांगें की हैं:

  • अध्यापिका अदिति शर्मा के विरुद्ध तत्काल निष्पक्ष जांच कराई जाए।
  • जांच पूर्ण होने तक उन्हें निलंबित (सस्पेंड) किया जाए।
  • विद्यालय परिसर में हुई इस घटना को देखते हुए संबंधित अधिकारियों की भी जवाबदेही तय की जाए।
  • पीड़ित बच्चों के इलाज का पूर्ण खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाए तथा उनके परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए।

निष्कर्ष: समाज के लिए एक कड़ी चेतावनी

"यह घटना केवल दो बच्चों का मामला नहीं है, बल्कि पूरे समाज की चेतावनी है। शिक्षा का मंदिर रील और दिखावे का मंच नहीं, बल्कि बच्चों के सुरक्षित भविष्य की नींव है।"

यदि आज इस मामले में कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो कल कोई और मासूम इसका शिकार हो सकता है। अब समय आ गया है कि प्रशासन, शिक्षा विभाग और समाज मिलकर यह स्पष्ट संदेश दें कि बच्चों की सुरक्षा से बड़ा कुछ नहीं — और जो भी इसके साथ खिलवाड़ करेगा, उसे किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

Pratahkal Newsroom

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