करौली में खाद्य सुरक्षा अभियान संपन्न, 105 संस्थानों में जागरूकता
ईट राइट स्कूल इनीशिएटिव के तहत प्रशिक्षु अधिकारियों ने विद्यार्थियों को मिलावट जांचने के तरीके सिखाए और फास्ट फूड के नुकसान के प्रति सचेत किया।

करौली जिले के एक स्कूल में 'ईट राइट स्कूल इनीशिएटिव' कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को खाद्य पदार्थों में मिलावट की पहचान करने के व्यावहारिक तरीके सिखाते प्रशिक्षु खाद्य सुरक्षा अधिकारी।
करौली, 17 मई। राजस्थान में आयुक्तालय खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण के निर्देशन में संचालित 'शुद्ध आहार मिलावट पर वार अभियान' के अंतर्गत जिला करौली में एक वृहद जागरूकता अलख जगाई गई है। इसके तहत आयोजित 'ईट राइट स्कूल इनीशिएटिव एवं हेल्दी लाइफस्टाइल कार्यक्रम' ने जिले के शैक्षणिक संस्थानों में दस्तक देकर विद्यार्थियों को मिलावटखोरी के विरुद्ध सचेत और जागरूक किया। यह व्यापक अभियान जिले के 105 से अधिक स्कूल-कॉलेजों तक सफलतापूर्वक पहुंचा, जहां खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने भावी पीढ़ी को सेहतमंद जीवनशैली और शुद्ध आहार के गंभीर एवं महत्वपूर्ण गुर सिखाए।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. सतीश चंद मीणा ने अभियान की सफलता और व्यापकता की जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस विशेष इनीशिएटिव के माध्यम से जिले के 105 से अधिक स्कूलों और कॉलेजों में विभिन्न चेतना कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन सत्रों का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को खाने-पीने की पौष्टिक व अच्छी वस्तुओं के चयन की समझ विकसित करना और हेल्दी लाइफस्टाइल के प्रति पूरी तरह जागरूक करना था। इस पूरे अभियान को धरातल पर उतारने का जिम्मा जिले के प्रशिक्षु खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने संभाला। प्रशिक्षु खाद्य सुरक्षा अधिकारी वीकेश कुमार मीना, विनोद कुमार मीना, यशवेंद चतुर्वेदी और पिंकी कुमारी ने सक्रिय भूमिका निभाते हुए छात्र-छात्राओं से सीधा संवाद स्थापित किया।
इन अधिकारियों ने विद्यार्थियों को आधुनिक खान-पान की विसंगतियों, जैसे कोल्ड ड्रिंक और फास्ट फूड के अत्यधिक सेवन से शरीर पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों और इससे होने वाली गंभीर बीमारियों के प्रति कड़ा आगाह किया। इसके साथ ही, पेय एवं खाद्य पदार्थों में धड़ल्ले से मिलाए जाने वाले हानिकारक सिंथेटिक रंगों की पहचान करने के लिए प्राथमिक जांच के तरीके भी सिखाए गए, ताकि बच्चे स्वयं सजग प्रहरी बन सकें।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को बाजार में मिलने वाले पैकेट्स और डिब्बाबंद भोजन (पैकेजिंग फूड) की सत्यता जांचने की व्यावहारिक शिक्षा दी गई। उन्हें सिखाया गया कि फूड पैकेट्स पर लेबल कैसे चेक करें, साथ ही उस पर अंकित मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस, सामग्री (इंग्रेडिएंट्स), ट्रांस फैट, साल्ट और शुगर की वैध व निर्धारित मात्रा को कैसे परखें। इसके अतिरिक्त, अधिकारियों ने फल पकाने की विधियों पर एक बेहद महत्वपूर्ण कानूनी पक्ष भी सामने रखा। उन्होंने बताया कि भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के नियमानुसार मौसमी फलों को पकाने के लिए इथाईलीन गैस का उपयोग करना पूरी तरह वैध है, जबकि इसके उलट कैल्सियम कार्बाइड का इस्तेमाल कर फलों को कृत्रिम रूप से पकाना पूर्णतः अवैध और दंडनीय है।
जागरूकता के इस महाअभियान के अंत में खाद्य सुरक्षा टीम ने विद्यार्थियों को अपने दैनिक आहार में 'कम चीनी, कम नमक और कम तेल' (थ्री-लो) के सिद्धांत को अपनाने का कड़ा परामर्श दिया। साथ ही, मिलावटखोरी के खिलाफ समाज में जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करते हुए यह भी बताया कि यदि कहीं भी मिलावट की आशंका या सूचना मिले, तो उसकी शिकायत राज्य सरकार के संपर्क पोर्टल 181 पर दर्ज कराई जा सकती है। युवाओं को जागरूक करने वाला यह अभियान जिले में खाद्य सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।

