करौली: सट्टा किंग की अवैध इमारत पर नहीं चला बुलडोजर, कलेक्ट्रेट पर हनुमान चालीसा का पाठ कर जताया आक्रोश
करौली में सट्टा किंग अमीनूद्दीन खान की अवैध बहुमंजिला इमारत पर बुलडोजर नहीं चलने से गुस्साए लोगों ने जिला कलेक्टर कार्यालय के सामने हनुमान चालीसा का पाठ किया। आरटीआई कार्यकर्ता अशोक पाठक के नेतृत्व में जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई। नगर परिषद के पूर्व सभापति के पुत्र पर कार्यवाही न होने से नाराज प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को घेरा।

करौली। राजस्थान के करौली जिला मुख्यालय पर सोमवार को उस समय माहौल गरमा गया जब जिला कलेक्टर कार्यालय के सामने हनुमान चालीसा की गूंज सुनाई देने लगी। यह कोई धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली और नगर परिषद की शिथिलता के विरुद्ध उपजा जनता का आक्रोश था। नगर परिषद के पूर्व सभापति रशीदा खातून के पुत्र और चर्चित सट्टा किंग अमीनूद्दीन खान की बहुमंजिला इमारत को गिराने में हो रही देरी से नाराज आरटीआई कार्यकर्ता और स्थानीय लोग अब आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए आरटीआई कार्यकर्ता अशोक पाठक के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोग दोपहर करीब 2:00 बजे जिला कलेक्टर नीलाभ सक्सेना के कार्यालय पहुंचे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि अंबेडकर भवन के पास निर्मित अमीनूद्दीन खान की बहुमंजिला इमारत को नगर परिषद प्रशासन ने पहले ही अवैध घोषित कर दिया था। परिषद की ओर से स्वयं अतिक्रमण हटाने के लिए चार दिन का अल्टीमेटम भी दिया गया था, लेकिन समय सीमा बीत जाने के बावजूद प्रशासन का बुलडोजर खामोश रहा। इसी 'अकर्मण्यता' से क्षुब्ध होकर कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और 'जिला प्रशासन मुर्दाबाद' के नारों के बीच कलेक्ट्रेट परिसर में ही हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया।
घटनाक्रम के दौरान मौके पर पुलिस और प्रशासनिक अमला तैनात रहा। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि प्रशासन रसूखदार अतिक्रमणकारियों को संरक्षण दे रहा है, जबकि आम जनता के लिए नियम अलग हैं। इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद पुलिस प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों से समझाइश की। अधिकारियों ने मामले में लिखित शिकायत प्राप्त की और नियमानुसार सख्त कार्यवाही का ठोस भरोसा दिलाया, जिसके बाद प्रदर्शनकारी वहां से हटे। यह घटना अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है, क्योंकि एक तरफ सट्टा किंग की अवैध संपत्ति पर कार्यवाही का दबाव है, तो दूसरी तरफ प्रशासन की साख दांव पर लगी है। देखना होगा कि क्या प्रशासन अपने अल्टीमेटम को अमलीजामा पहनाते हुए बुलडोजर की कार्यवाही सुनिश्चित करता है या यह विरोध प्रदर्शन और उग्र रूप धारण करेगा।

Pratahkal Bureau
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