हिण्डौन (करौली)। राजस्थान के हिण्डौन उपखंड के पौछडी गाँव में अंधविश्वास और डर का सहारा लेकर ठगी की एक ऐसी वारदात सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। दो शातिर ठगों ने साधु का भेष धरकर एक महिला की ममता और सुहाग की सलामती की भावना के साथ खिलवाड़ करते हुए लाखों के सोने के जेवर और नगदी पार कर दी। यह घटना न केवल अपराध की पराकाष्ठा है, बल्कि समाज में जड़ें जमाए अंधविश्वास के उस काले सच को भी उजागर करती है, जिसका फायदा अपराधी बेखौफ होकर उठा रहे हैं।

वारदात शनिवार दोपहर करीब 2:30 बजे की है, जब पौछडी निवासी नीलम पत्नी अनिल अपने घर पर मौजूद थी। इसी दौरान साधु के वेश में दो अज्ञात व्यक्ति उसके द्वार पर पहुँचे। बातों ही बातों में उन कथित साधुओं ने महिला को अपने जाल में फंसा लिया और दावा किया कि उसके पति अनिल और उसके बेटे पर भारी 'ऊपरी साया' मंडरा रहा है। ठगों ने नीलम के मन में यह खौफ भर दिया कि यदि जल्द ही इस बाधा का निवारण नहीं किया गया, तो उसके परिवार के इन दोनों सदस्यों की जान को बड़ा खतरा हो सकता है। अपने सुहाग और संतान की जान बचाने के लिए व्याकुल नीलम ने बिना सोचे-समझे उन ढोंगियों की बातों पर यकीन कर लिया।

ठगों ने इस कथित बाधा को दूर करने के लिए सोने और नगदी के 'दान' की शर्त रखी। डर के साये में जी रही नीलम घर के भीतर गई और अपनी ढाई तोला सोने की चेन तथा 11,000 रुपये की नगदी लाकर उन ठगों के हाथ में सौंप दी। जालसाजों की योजना यहीं खत्म नहीं हुई; उन्होंने महिला से कहा कि इस बाधा से पूरी तरह मुक्ति पाने के लिए उसे इस सोने और नगदी को रात के अंधेरे में श्मशान घाट में ले जाकर गाड़ना होगा। जब डरी हुई महिला ने रात में श्मशान जाने से मना कर दिया, तो ठगों ने बड़ी ही चतुराई से इसे अपनी जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि यह जोखिम भरा अनुष्ठान वे खुद संपन्न कर देंगे। सामान हाथ लगते ही दोनों शातिर ठग गाँव से रफूचक्कर हो गए।

जब काफी देर तक ठग वापस नहीं आए और गाँव की अन्य महिलाएं मौके पर जुटीं, तब नीलम को अपनी बड़ी भूल और ठगी का अहसास हुआ। शोर मचने पर ग्रामीणों ने तुरंत सक्रियता दिखाई और संदिग्धों की तलाश शुरू की, लेकिन तब तक ठग काफी दूर निकल चुके थे। इस घटना ने पूरे पौछडी गाँव में आक्रोश और भय का माहौल पैदा कर दिया है। फिलहाल इस मामले की जानकारी स्थानीय पुलिस तक पहुँच रही है, जिसके बाद आरोपियों की धरपकड़ की कवायद शुरू की जाएगी। यह घटना एक कड़ा सबक है कि श्रद्धा के नाम पर घर आए अनजान चेहरों पर आँख मूंदकर भरोसा करना कितना घातक साबित हो सकता है।

Pratahkal Newsroom

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