करौली जिले की हिंडौन विधानसभा सीट पर चुनाव परिणाम आने के बाद भी पूर्व विधायक राजकुमारी जाटव की निजी गाड़ी पर ‘विधायक’ लिखी पट्टिका का इस्तेमाल चर्चा का विषय बना हुआ है। विधानसभा चुनाव में पराजय के बावजूद उनकी गाड़ी पर अंग्रेजी के छोटे अक्षरों में ‘ex’ और हिंदी के बड़े अक्षरों में ‘विधायक’ लिखा हुआ है। इस मामले में स्थानीय प्रशासन की निष्क्रियता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

हिंडौन सिटी की राजनीति अपने अनूठे घटनाक्रमों के लिए जानी जाती रही है। बीते विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी अनीता जाटव ने हिंडौन सीट से जीत दर्ज कर विधानसभा में पहुंच बनाई थी। वहीं, भारतीय जनता पार्टी की प्रत्याशी और पूर्व विधायक राजकुमारी जाटव को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। चुनाव परिणाम आए लंबा समय बीत जाने के बाद भी उनकी निजी गाड़ी पर पदनाम दर्शाने वाली पट्टिका लगे होने से राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा हो रही है।

इस मामले को लेकर राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि चुनाव हारने के बाद भी पूर्व विधायक अपनी गाड़ी पर इस तरह की पट्टिका लगाकर कैसे घूम रही हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि सत्तारूढ़ दल से जुड़ाव के कारण नियमों के उल्लंघन के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है। हालांकि, इस संबंध में प्रशासन की ओर से किसी कार्रवाई या आधिकारिक बयान का उल्लेख नहीं है।

हिंडौन और करौली के पुराने राजनीतिक एवं प्रशासनिक घटनाक्रमों का हवाला देते हुए लोग मौजूदा स्थिति की तुलना पहले के दौर से कर रहे हैं। बुजुर्गों के अनुसार, एक समय ऐसा भी था जब पद की अवधि समाप्त होने के बाद भी उसका इस्तेमाल करने पर प्रशासन तत्काल कार्रवाई करता था।

बताया जाता है कि दिल्ली के तत्कालीन उपमहापौर और महू के मूल निवासी पन्नालाल खेरवाल अपना कार्यकाल समाप्त होने के बाद कार पर ‘उपमहापौर’ लिखी पट्टिका लगाकर करौली की ओर जा रहे थे। जब उनकी गाड़ी हिंडौन कोतवाली थाने के सामने से गुजरी, तब तत्कालीन कड़क पुलिस अधीक्षक की नजर उस पट्टिका पर पड़ी। पद का कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद गाड़ी पर पदनाम का इस्तेमाल किए जाने पर पुलिस अधीक्षक ने तत्काल संज्ञान लिया और उनकी गाड़ी को कोतवाली थाने में खड़ा करवा दिया था। इस घटना को उस दौर में कानून के प्रभाव और पदनाम के दुरुपयोग पर प्रशासन की सख्ती के उदाहरण के तौर पर याद किया जाता है।

वर्तमान मामले में प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं, क्योंकि जानकारों का कहना है कि मोटर व्हीकल एक्ट और सरकारी नियमों के अनुसार, कोई भी जनप्रतिनिधि या पूर्व पदाधिकारी कार्यकाल समाप्त होने अथवा चुनाव हारने के बाद अपने निजी वाहन पर आधिकारिक पदनाम या उससे संबंधित पट्टिका का इस्तेमाल नहीं कर सकता। इसके बावजूद हिंडौन में पूर्व विधायक की गाड़ी पर ‘विधायक’ लिखी पट्टिका दिखाई देने की बात सामने आ रही है।

इस मामले में पुलिस और प्रशासन की ओर से कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। राजनीतिक रसूख के कारण कार्रवाई नहीं होने की चर्चाओं के बीच स्थानीय प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। अब निगाहें यातायात पुलिस और स्थानीय प्रशासन पर हैं कि वे इस मामले में कोई कदम उठाते हैं या नहीं। यह घटनाक्रम सार्वजनिक वाहनों पर पदनाम के इस्तेमाल से जुड़े नियमों के पालन और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवालों के कारण चर्चा में है।

Rajendra Kumbhakar, Karauli

Rajendra Kumbhakar, Karauli

नाम: राजेन्द्र प्रसाद कुम्भाकर

वर्तमान पद: करौली जिला रिपोर्टर (प्रातःकाल)

कार्यक्षेत्र: करौली जिला मुख्यालय, हिण्डौन सिटी, सपोटरा, टोडाभीम, और मंडरायल (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): प्रशासनिक खबरें, राजनीति, क्राइम, स्वास्थ्य, और शिक्षा

परिचय 

राजेन्द्र प्रसाद कुंभकार राजस्थान के करौली जिले के जिला रिपोर्टर हैं। वह पिछले 6 महीने से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं। वह मुख्य रूप से करौली जिला मुख्यालय की प्रशासनिक खबरों के साथ-साथ पूरे जिले के अंतर्गत आने वाले हिण्डौन सिटी, सपोटरा, टोडाभीम और मंडरायल क्षेत्रों की राजनीतिक, आपराधिक, स्वास्थ्य और शैक्षणिक गतिविधियों को कवर करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 वर्ष का अनुभव । 'प्रातःकाल' से जुड़ने से पहले वह निम्नलिखित मीडिया संस्थानों, डिजिटल ऐप्स और समाचार पत्रों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं:

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शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने अपनी शिक्षा में स्नातक (Graduation) की डिग्री हासिल की है।

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