हिण्डौन सिटी (करौली)। स्वास्थ्य सेवाओं के दावों के बीच करौली जिले के हिण्डौन सिटी स्थित राजकीय जिला अस्पताल की संवेदनहीनता का एक भयावह चेहरा सामने आया है, जहाँ एक हार्ट अटैक से पीड़ित मरीज को एंबुलेंस की बदहाली के कारण लगभग एक घंटे तक मौत से जूझना पड़ा। घटना उस समय हुई जब अस्पताल प्रशासन द्वारा मरीज को जयपुर रेफर किया गया। परिजनों का आरोप है कि मरीज को एंबुलेंस में शिफ्ट करने के बाद उन्हें वाहन की जर्जर स्थिति का पता चला, जिसमें ऑक्सीजन पाइप खराब, पंखा और एयर कंडीशनर बंद थे, साथ ही स्ट्रेचर भी टूटा हुआ था। सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि उक्त एंबुलेंस पर दो अलग-अलग नंबर प्लेट लगी हुई थीं, जो इसके संचालन में भारी अनियमितताओं की ओर इशारा करती हैं।

अस्पताल पहुँचने में 20 मिनट की देरी के बाद जब मरीज एंबुलेंस में शिफ्ट हुआ, तो सुविधाओं के अभाव में उसकी हालत बिगड़ने लगी। एंबुलेंस कर्मियों द्वारा दूसरी गाड़ी मंगाने के नाम पर परिजनों को आधा घंटा और इंतजार कराया गया। लगभग एक घंटे तक असहनीय पीड़ा झेलने के बाद, अंततः परिजनों ने स्वयं के स्तर पर निजी एंबुलेंस की व्यवस्था की और मरीज को जयपुर के लिए रवाना किया। इस पूरी घटना के दौरान न केवल मरीज का जीवन दांव पर लगा, बल्कि मौके पर मौजूद पत्रकार के साथ एंबुलेंस कर्मियों द्वारा की गई अभद्रता ने भी मामले को और तूल दे दिया है। राज्य सरकार की गाइडलाइन के बावजूद एंबुलेंस के संचालन में परिवहन विभाग और अस्पताल प्रशासन की यह घोर लापरवाही अब सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गई है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था की जड़ों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Pratahkal Newsroom

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