करौली में फूटा किसानों का गुस्सा: भरतपुर-ब्यावर एक्सप्रेस-वे के विरोध में शेरपुर के ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट घेरा, मुख्यमंत्री के नाम दी चेतावनी
करौली में भरतपुर-ब्यावर एक्सप्रेस-वे के विरोध में शेरपुर और श्रीमहावीरजी के किसानों ने जिला कलेक्टर निलाभ सक्सेना को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। लघु किसानों ने भूमि अवाप्ति को आजीविका पर प्रहार बताते हुए प्रोजेक्ट को पूंजीपतियों के हित में बताया और इसे तुरंत निरस्त करने की मांग को लेकर भारी प्रदर्शन किया।

करौली। राजस्थान में बुनियादी ढांचे के विकास और किसानों के हितों के बीच एक बार फिर टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। करौली जिले में प्रस्तावित भरतपुर-ब्यावर एक्सप्रेस-वे को लेकर विरोध की आग सुलगने लगी है। गुरुवार, 15 जनवरी को करौली जिला मुख्यालय पर उस समय गहमागहमी बढ़ गई, जब नवसृजित पंचायत समिति शेरपुर सहित आसपास के दर्जनों गांवों के ग्रामीण लामबंद होकर कलेक्ट्रेट पहुंच गए। हाथों में अपनी मांगों की तख्तियां लिए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए किसानों ने इस प्रोजेक्ट को निरस्त करने की पुरजोर मांग की। दोपहर करीब 1:30 बजे उपजे इस भारी विरोध प्रदर्शन के बीच ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर निलाभ सक्सेना को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नाम एक ज्ञापन सौंपकर स्पष्ट कर दिया कि वे अपनी उपजाऊ भूमि का बलिदान किसी भी कीमत पर नहीं देंगे।
प्रदर्शनकारी ग्रामीणों का नेतृत्व कर रहे शेरपुर और श्रीमहावीरजी पंचायत समिति के किसानों ने इस एक्सप्रेस-वे को 'विनाशकारी' करार दिया है। ज्ञापन में ग्रामीणों ने इस बात का कड़ा उल्लेख किया है कि इस प्रोजेक्ट के लिए होने वाली भूमि अवाप्ति में अधिकांश लघु सीमांत किसान प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों का तर्क है कि उनके पास आजीविका का एकमात्र साधन खेती और पशुपालन है। यदि उनकी जमीनें इस एक्सप्रेस-वे की भेंट चढ़ गईं, तो उनके सामने दाने-दाने का संकट खड़ा हो जाएगा और वे पूरी तरह बेरोजगार हो जाएंगे। किसानों ने तीखे शब्दों में सरकार पर आरोप लगाया कि यह एक्सप्रेस-वे आम जनता के फायदे के लिए नहीं, बल्कि केवल मुट्ठी भर पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाया जा रहा है, जिसका वे अंतिम सांस तक विरोध करेंगे।
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान करौली जिला कलेक्टर निलाभ सक्सेना ने ग्रामीणों की समस्याओं को सुना और ज्ञापन प्राप्त कर उसे उचित माध्यम से मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। हालांकि, ग्रामीणों के चेहरे पर व्याप्त आक्रोश यह साफ बयां कर रहा था कि वे केवल आश्वासनों से संतुष्ट होने वाले नहीं हैं। प्रदर्शन के दौरान शेरपुर पंचायत समिति के साथ-साथ श्रीमहावीरजी पंचायत समिति के दर्जनों प्रमुख किसान और ग्रामीण उपस्थित रहे, जिन्होंने एक स्वर में इस प्रोजेक्ट के सर्वे और निर्माण कार्य को तत्काल रोकने की मांग की। यह आंदोलन आने वाले दिनों में सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है, क्योंकि किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी भूमि केवल मिट्टी नहीं बल्कि उनके अस्तित्व का आधार है।

Pratahkal Bureau
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