सपोटरा में जिला कलेक्टर के आदेशों की अनदेखी: कड़ाके की ठंड में खुले निजी स्कूल, प्रशासन बेखबर
करौली जिला कलेक्टर निलाभ सक्सेना के शीतलहर अवकाश आदेशों की सपोटरा में निजी स्कूलों ने जमकर धज्जियां उड़ाईं। कक्षा 1 से 5वीं तक के बच्चों को कड़ाके की ठंड में स्कूल बुलाया गया और समय सीमा का उल्लंघन किया गया। शिक्षा विभाग की लापरवाही और निजी स्कूलों की मनमानी पर आधारित इस विस्तृत रिपोर्ट को पढ़ें। क्या प्रशासन लेगा इन स्कूलों पर सख्त एक्शन?

सपोटरा (करौली)। राजस्थान के करौली जिले में इन दिनों शीतलहर का सितम जारी है, लेकिन प्रशासन के सख्त निर्देशों के बावजूद सपोटरा क्षेत्र में शिक्षा के मंदिर व्यापारिक हठधर्मिता के केंद्र बनते जा रहे हैं। करौली जिला कलेक्टर निलाभ सक्सेना द्वारा आपदा प्रबंधन के तहत जारी किए गए शीतकालीन अवकाश के आदेशों की सपोटरा के निजी स्कूल संचालक सरेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। मासूम बच्चों की सेहत को दांव पर लगाकर निजी स्कूलों द्वारा नियमों को ताक पर रखना न केवल सरकारी आदेशों की अवहेलना है, बल्कि शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवालिया निशान खड़े कर रहा है।
उल्लेखनीय है कि जिले में बढ़ते शीतलहर के प्रकोप को देखते हुए जिला कलेक्टर निलाभ सक्सेना ने जनहित में एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया था। इसके तहत कक्षा एक से पांचवीं तक के विद्यार्थियों के लिए सरकारी और गैर-सरकारी, दोनों प्रकार के विद्यालयों में पूर्ण अवकाश घोषित किया गया था। साथ ही, अन्य कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए स्कूल का समय सुबह 10:00 बजे के बाद निर्धारित किया गया था ताकि वे ठिठुरन भरी सुबह की चपेट में न आएं। इसके बावजूद, सपोटरा के निजी स्कूल संचालकों ने इन आदेशों को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
रियलिटी चेक के दौरान क्षेत्र की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती नजर आई। कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बीच निजी स्कूलों की बसें नन्हें-मुन्ने बच्चों को लेकर सड़कों पर दौड़ती दिखाई दीं। प्राथमिक स्तर के बच्चों को जबरन स्कूल बुलाया गया और ऊपरी कक्षाओं के छात्रों को भी निर्धारित समय से काफी पहले स्कूल परिसर में हाजिर होने के निर्देश दिए गए। जब इस संबंध में स्कूल संचालकों से पूछताछ की गई, तो उन्होंने अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय सारा दोष अभिभावकों के सिर मढ़ दिया। हालांकि, डरे-सहमे स्कूली बच्चों ने दबी जुबान में स्वीकार किया कि उन्हें स्कूल प्रशासन द्वारा ही नियमित रूप से आने के लिए बाध्य किया गया है।
हैरानी की बात यह है कि एक ओर जहां नौनिहाल इस हाड़ कंपाने वाली ठंड में ठिठुरने को मजबूर हैं, वहीं स्थानीय शिक्षा विभाग पूरी तरह बेखबर बना हुआ है। प्रशासन की इस चुप्पी ने निजी स्कूलों के हौसले और बुलंद कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि जिला कलेक्टर के आदेशों का मजाक उड़ाने वाले इन संस्थानों पर शासन क्या दंडात्मक कार्रवाई करता है या फिर मासूमों की सेहत इसी तरह सिस्टम की अनदेखी का शिकार होती रहेगी।

Rajendra Kumbhakar, Karauli
वर्तमान पद: करौली जिला रिपोर्टर (प्रातःकाल)
कार्यक्षेत्र: करौली जिला मुख्यालय, हिण्डौन सिटी, सपोटरा, टोडाभीम, और मंडरायल (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): प्रशासनिक खबरें, राजनीति, क्राइम, स्वास्थ्य, और शिक्षा
परिचय
राजेन्द्र प्रसाद कुंभकार राजस्थान के करौली जिले के जिला रिपोर्टर हैं। वह पिछले 6 महीने से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं। वह मुख्य रूप से करौली जिला मुख्यालय की प्रशासनिक खबरों के साथ-साथ पूरे जिले के अंतर्गत आने वाले हिण्डौन सिटी, सपोटरा, टोडाभीम और मंडरायल क्षेत्रों की राजनीतिक, आपराधिक, स्वास्थ्य और शैक्षणिक गतिविधियों को कवर करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 वर्ष का अनुभव । 'प्रातःकाल' से जुड़ने से पहले वह निम्नलिखित मीडिया संस्थानों, डिजिटल ऐप्स और समाचार पत्रों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं:
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शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी शिक्षा में स्नातक (Graduation) की डिग्री हासिल की है।
