करौली। "बालिका सशक्तिकरण के लिए समान अधिकार की परिभाषा को धरातल पर उतारना केवल सरकार का नहीं, बल्कि समाज के हर नागरिक का दायित्व है।" इसी संकल्प के साथ राष्ट्रीय बालिका दिवस 2026 के अवसर पर राजकीय महाविद्यालय करौली में जिला प्रशासन, एक्शनएड और यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में एक ऊर्जावान और चेतना जागृत करने वाले विशेष कार्यक्रम का आगाज़ हुआ। यह आयोजन केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि उन रूढ़ियों को तोड़ने का एक शंखनाद था जो सदियों से बेटियों की राह में रोड़ा बनी हुई हैं।

कार्यक्रम की रूपरेखा को विस्तार देते हुए एक्शनएड यूनिसेफ के जिला समन्वयक दिनेश कुमार बैरवा ने स्पष्ट किया कि "एक उज्जवल भविष्य के लिए बालिकाओं को सशक्त बनाना" ही आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और अवसरों की समानता को इस मिशन का मुख्य आधार बताया। वर्ष 2008 में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया यह दिवस आज करौली की धरती पर एक नई इबारत लिखता नजर आया, जहाँ भेदभाव मिटाने और समान अवसर पैदा करने पर जोर दिया गया।

प्रशासनिक और कानूनी बारीकियों को साझा करते हुए जिला बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष अनिल शर्मा ने इस पहल को वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' के विजन और महिला-नेतृत्व वाले विकास से जोड़ा। उन्होंने समाज को आईना दिखाते हुए कन्या भ्रूण हत्या, गिरते लिंगानुपात और बाल विवाह जैसी चुनौतियों पर कड़ा प्रहार किया। इसी क्रम में समिति के सदस्य फजले अहमद ने पोक्सो एक्ट, जेजे एक्ट और बाल कल्याण समिति की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालते हुए बालिकाओं को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति सजग किया।

शैक्षणिक दृष्टिकोण को सामने रखते हुए महाविद्यालय प्राचार्य रफिक अहमद ने डिजिटल समावेशन और STEM क्षेत्रों में बेटियों की भागीदारी को भविष्य की जरूरत बताया। वहीं, महिला अधिकारिता विभाग की जिला ब्रांड एम्बेसडर अनिता मीणा ने आंकड़ों की बाजीगरी के जरिए महिला सशक्तिकरण की सफल तस्वीर पेश की। उन्होंने बताया कि 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' अभियान के कारण जन्म के समय लिंगानुपात (SRB) जो 2014-15 में 918 था, वह 2023-24 में बढ़कर 930 हो गया है। साथ ही, माध्यमिक स्तर पर बालिकाओं का नामांकन अनुपात (GER) 2024-25 में 80.2 प्रतिशत तक पहुँच जाना एक क्रांतिकारी बदलाव का संकेत है।

कानूनी सुरक्षा और तत्काल सहायता के तंत्र को समझाते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकार मित्र राधारमण सारस्वत ने नालसा हेल्पलाइन नंबर 15100 और बालकों के मैत्रीपूर्ण विधिक अधिकारों की जानकारी दी। चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के प्रभारी भीकम सिंह ने आपात स्थिति में मदद लेने के तरीकों को साझा किया। सुरक्षा की दृष्टि से महिला थानाधिकारी सोनभद्र ने राजस्थान पुलिस की 'कालिका यूनिट' और 'ऑपरेशन साइबर शील्ड' जैसी आधुनिक सुरक्षा प्रणालियों के बारे में विस्तार से बताया।

सामाजिक चेतना के इस प्रवाह में महिला अधिकारिता विभाग की जैंडर स्पेशलिस्ट सीमा चतुर्वेदी ने जैंडर संवेदनशीलता और सुपरवाइजर गोमती मीणा ने 'शिक्षा सेतु' जैसी योजनाओं के लाभ गिनाए। इस गरिमामयी समारोह में राजकीय महाविद्यालय, राजकीय कन्या महाविद्यालय, राजकीय बालिका विद्यालय और मौलाना आजाद उच्च माध्यमिक विद्यालय की छात्राओं ने अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से समां बाँध दिया, जिन्हें बाद में सम्मानित भी किया गया।

इस आयोजन की सफलता में महिला प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ. सोनम मीना, अध्यापिका रेशमबाला, स्वयंसेवक श्वेता शर्मा, जगदीश जाट, कोरो फैलो हेमराज माली और चाइल्ड हेल्पलाइन सुपरवाइजर पवन जागा सहित महाविद्यालय के समस्त स्टाफ और छात्राओं की सक्रिय भागीदारी ने यह सिद्ध कर दिया कि करौली की बेटियाँ अब रुकने वाली नहीं हैं। यह कार्यक्रम न केवल जागरूकता का माध्यम बना, बल्कि न्यायसंगत भविष्य के निर्माण की दिशा में एक सशक्त कदम के रूप में दर्ज हुआ।

Pratahkal Newsroom

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