करौली। 17 दिसंबर, बुधवार को दोपहर बाद करौली जिला मुख्यालय पर कलेक्ट्रेट के सामने कांग्रेस जिला पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) सहित संवैधानिक संस्थाओं के कथित दुरुपयोग और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप के विरोध में आयोजित किया गया।

धरना-प्रदर्शन में टोडाभीम विधायक एवं कांग्रेस जिलाध्यक्ष घनश्याम महर, करौली के पूर्व विधायक लाखन सिंह मीणा, पीसीसी सचिव भूपेंद्र भारद्वाज, विशाल मीणा और पीसीसी महासचिव हुकुमबाई मीणा सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के अध्यक्षों और पदाधिकारी भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए।

वक्ताओं ने भाजपा नीत केंद्र एवं राज्य सरकारों पर संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने मतदाताओं को परेशान करने, मतदाता सूची से नाम काटने, वोट चोरी के माध्यम से सत्ता में आने और ईडी-सीबीआई जैसी एजेंसियों के दुरुपयोग जैसे मुद्दों को उठाया। कांग्रेस नेताओं ने इसे लोकतंत्र पर सीधा हमला बताया।

धरना समाप्त होने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट के बाहर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन किया और जोरदार नारेबाजी की। पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कलेक्ट्रेट परिसर में जाप्ता तैनात रखा।

कांग्रेस जिलाध्यक्ष एवं टोडाभीम विधायक घनश्याम महर ने कहा कि कांग्रेस भाजपा और आरएसएस की नीतियों के खिलाफ विरोध जारी रखेगी। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों पर धर्म की राजनीति करने और समाज में सांप्रदायिकता फैलाने का भी आरोप लगाया।

इस प्रदर्शन ने करौली में राजनीतिक हलकों में सियासी माहौल को गर्म कर दिया है और संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग के आरोपों को लेकर चर्चा को नया मोड़ दिया है।

Pratahkal Bureau

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