करौली में गरजी कांग्रेस: डोटासरा और जूली का सरकार पर तीखा प्रहार, किसानों की जमीन और पहाड़ों को बचाने का लिया संकल्प
करौली के कटकड़ में आयोजित किसान सम्मेलन में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भाजपा सरकार पर जमकर प्रहार किया। लौह अयस्क खनन और ग्रीन एक्सप्रेस-वे के विरोध में उतरी कांग्रेस ने किसानों की जमीन बचाने का संकल्प लिया और प्रशासन को सख्त चेतावनी दी। इस लेख में जानें कैसे करौली की पहाड़ियों और किसानों के हक की लड़ाई अब एक बड़े राजनीतिक संग्राम में बदल गई है।

करौली। राजस्थान के करौली जिले में सियासी पारा उस वक्त अपने चरम पर पहुंच गया जब कटकड़ मोड़ पर आयोजित विशाल किसान सम्मेलन में कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने प्रदेश और केंद्र की 'डबल इंजन' सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। राजस्थान कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने हुंकार भरते हुए सरकार पर आरोप लगाया कि विकास के नाम पर किसानों के साथ बड़ा छलावा किया जा रहा है। लौह अयस्क खनन और ग्रीन एक्सप्रेस-वे की परियोजनाओं को लेकर उपजा यह आक्रोश अब एक बड़े जन आंदोलन की शक्ल अख्तियार कर चुका है।
मंच से जनता को संबोधित करते हुए गोविंद सिंह डोटासरा ने बेहद सख्त लहजे में प्रशासन को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि करौली के किसानों से प्रशासन को भिड़ने की हिमाकत नहीं करनी चाहिए, अन्यथा कांग्रेस पार्टी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और स्थानीय प्रशासन को 'मोरया' बुलवा देगी। डोटासरा ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि गुजरात के उद्योगपतियों की पर्ची दिल्ली से होकर मुख्यमंत्री तक पहुंचती है, जिसके बाद किसानों की बेशकीमती जमीनें कौड़ियों के दाम पर उद्योगपतियों को सौंप दी जाती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्रीन एक्सप्रेस-वे के नाम पर किसानों की उपजाऊ जमीन का अधिग्रहण किसी भी कीमत पर नहीं होने दिया जाएगा और वे विधानसभा में जनता की इस बुलंद आवाज को मजबूती से उठाएंगे।
सदन में विपक्ष की आवाज बुलंद करने वाले नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य और किसानों की मेहनत के साथ किया जा रहा विश्वासघात बर्दाश्त से बाहर है। वहीं, सांसद भजन लाल जाटव ने पहाड़ियों और जंगलों के संरक्षण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि केंद्र सरकार बाघों के संरक्षण का बहाना बनाकर ग्रामीणों को उनकी पुश्तैनी जमीन से बेदखल करने की साजिश रच रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जल, जंगल और जमीन पर पहला हक वहां के आम नागरिक का है, न कि पूंजीपतियों का।
विवाद की मुख्य जड़ लिलोटी, सिंघान और टोडूपुरा क्षेत्र की पहाड़ियों में मिले लौह अयस्क के विशाल भंडार हैं। खनिज विभाग द्वारा एक निजी कंपनी को खनन के लिए अधिकृत किए जाने के बाद से ही स्थानीय ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है। इसके साथ ही हिंडौन क्षेत्र से गुजरने वाले ब्यावर-भरतपुर एक्सप्रेस-वे के लिए कृषि भूमि के अधिग्रहण की घोषणा ने आग में घी डालने का काम किया है। ग्रामीणों का तर्क है कि विकास की इन परियोजनाओं से उनकी आजीविका के साधन छिन जाएंगे। सुरक्षा की दृष्टि से सम्मेलन स्थल पर हिंडौन के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सत्येंद्र पाल सिंह, तहसीलदार सीमा बघेल और डीएसपी मुनेश मीना भारी पुलिस बल के साथ तैनात रहे, ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे। यह महापंचायत सरकार के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि यदि किसानों की मांगों को अनसुना किया गया, तो आने वाले दिनों में यह विरोध प्रदर्शन और भी उग्र रूप ले सकता है।

Pratahkal Bureau
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