करौली। समाज के हाशिए पर खड़े विमुक्त, घुमंतू और अर्द्धघुमंतू समुदायों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए करौली जिले में एक व्यापक अभियान का शंखनाद हो चुका है। एक्शनएड एसोसिएशन के आव्हान पर जिले के विभिन्न सामाजिक संगठन और स्वयंसेवक एकजुट होकर उन लोगों की आवाज बन रहे हैं, जो दशकों से अपनी पहचान और सरकारी लाभों से वंचित रहे हैं। जिला कलक्टर नीलाभ सक्सेना के दिशा-निर्देशन में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा आयोजित किए जा रहे ये विशेष सहायता शिविर केवल सरकारी औपचारिकता नहीं, बल्कि इन समुदायों के जीवन में परिवर्तन लाने वाला एक महायज्ञ साबित होने वाले हैं।

राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप, घुमंतू समुदाय के प्रत्येक व्यक्ति को ऑनलाइन पहचान प्रमाण पत्र जारी कर उन्हें केंद्र और राज्य की जनकल्याणकारी योजनाओं की छतरी के नीचे लाया जाएगा। करौली जिले में इस मुहिम को गति देते हुए 15 जनवरी से प्री-कैंप और 19 जनवरी से मुख्य शिविरों का आयोजन किया जा रहा है, जो 31 जनवरी 2026 तक चलेंगे। इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, जाति प्रमाण पत्र और मूल निवास जैसे अनिवार्य दस्तावेज तैयार करना है, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पात्र व्यक्ति तक पहुँच सके।

इस पुनीत कार्य में एक्शनएड एसोसिएशन करौली की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण नजर आ रही है। जिला समन्वयक दिनेश कुमार बैरवा के नेतृत्व में कार्यकर्ता और स्वयंसेवक दुर्गम ढाणियों और बस्तियों तक पहुँच रहे हैं। दिनेश कुमार बैरवा ने बताया कि एक्शनएड एसोसिएशन इंडिया लंबे समय से "विमुक्त और घुमंतू जनजातियों के न्यायसंगत भविष्य की कार्यसूची" (DNTs Agenda for Just Futures) के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और भूमि अधिकारों के लिए संघर्षरत है। इसी कड़ी में, जिले के मासलपुर, हिंडौनसिटी, श्री महावीर जी, मंडरायल, सपोटरा, नादौती और टोडाभीम क्षेत्रों में सघन डोर-टू-डोर सर्वे कर उन लोगों को चिह्नित किया जा रहा है जिनका आज तक कोई दस्तावेजीकरण नहीं हुआ है।

प्रशासनिक स्तर पर जहाँ जिला कलक्टर नीलाभ सक्सेना के मार्गदर्शन में पूरी मशीनरी सक्रिय है, वहीं सामाजिक धरातल पर डॉ. अम्बेडकर जन उत्थान समिति के समता ग्रुप, जीएलोडीपी फैलो, एक्शन फोर एडवोकेसी विकास अनुसंधान संस्थान और 'माय भारत करौली' के स्वयंसेवक कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं। इन सभी संगठनों का एक ही लक्ष्य है कि शिविर के दिन कोई भी घुमंतू परिवार घर पर न छूटे और उन्हें शिविर स्थल तक लाकर उनके अधिकारों की पुष्टि की जा सके। यह सामूहिक प्रयास न केवल इन समुदायों को कानूनी पहचान दिलाएगा, बल्कि वर्षों के भेदभाव को समाप्त कर उन्हें गरिमापूर्ण जीवन की ओर अग्रसर करेगा।

Pratahkal Bureau

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