झालावाड़ जिले की सुनेल पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाली उन्हेल ग्राम पंचायत में मनरेगा योजना के तहत करीब 28 लाख रुपये की लागत से बनने वाली दो पक्की सड़कों के निर्माण को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि दोनों सड़कों का निर्माण केवल कागजों में पूरा दिखाया गया, जबकि तीन साल पहले ही पूरी राशि का भुगतान भी कर दिया गया। इसके बावजूद मौके पर सड़कों का नामोनिशान नहीं है और आज भी रास्तों पर कीचड़ तथा गड्ढे दिखाई देते हैं।

चुनावी दौरों के बीच क्षेत्र में विकास कार्यों को लेकर किए जा रहे दावों के बीच यह मामला सामने आया है। एक तरफ सांसद और जनप्रतिनिधि चुनावी दौरों के दौरान विकास के दावे कर रहे हैं और जनता को लुभाने में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्हेल पंचायत में स्वीकृत सड़क निर्माण कार्यों की वास्तविक स्थिति पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि इस तरह के करोड़ों-अरबों रुपये के गोलमाल में स्थानीय अधिकारियों की भी मिलीभगत हो सकती है। उनका कहना है कि जांच और कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है।

ग्रामीणों ने मीडिया को बताया कि मनरेगा योजना के तहत दो प्रमुख मार्गों के निर्माण के लिए बजट स्वीकृत किया गया था। इनमें उन्हेल से नरसिंह मार्ग पर सीमेंट कंक्रीट (पीसीसी) सड़क निर्माण के लिए करीब 14 लाख रुपये मंजूर किए गए थे। वहीं, कादर नगर से केसरपुरा मार्ग के लिए भी करीब 14 लाख रुपये की राशि स्वीकृत हुई थी। इस तरह दोनों सड़क परियोजनाओं की कुल स्वीकृत लागत करीब 28 लाख रुपये बताई गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि दोनों मार्गों पर आज तक सड़क निर्माण तो दूर, ग्रेवल यानी रोड़ी-पत्थर तक नहीं डाले गए। बारिश के दौरान ही नहीं, सामान्य दिनों में भी इन रास्तों पर कीचड़ और गड्ढों की स्थिति बनी रहती है। इसके बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में निर्माण कार्य पूरा दर्शाकर 'जीरो-टेक' कर दिया गया और पूरी राशि सीधे सरपंच की फर्म में स्थानांतरित कर दी गई। इस भुगतान प्रक्रिया और मौके पर सड़क नहीं होने के ग्रामीणों के दावों ने निर्माण कार्यों की वास्तविक स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामले को लेकर अधिकारियों से बातचीत की गई तो ग्राम विकास अधिकारी सुरेश जैन ने दावा किया कि सड़क का निर्माण नियमानुसार किया गया है। उनके अनुसार, जूनियर इंजीनियर (JEN) द्वारा प्रतिदिन जियो-टैग भी किया गया था। विकास अधिकारी की संस्तुति के बाद ही भुगतान जारी किया गया। अधिकारियों का कहना है कि सड़क मौके पर मौजूद है, जबकि ग्रामीण इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे फर्जीवाड़ा बता रहे हैं।

उन्हेल ग्राम पंचायत में सड़क निर्माण और भुगतान को लेकर उठे इन सवालों के बीच ग्रामीणों के आरोपों तथा अधिकारियों के दावों में स्पष्ट विरोधाभास सामने आया है। एक ओर सरकारी रिकॉर्ड में निर्माण पूरा होने और भुगतान जारी किए जाने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण दोनों मार्गों पर सड़क और ग्रेवल तक नहीं होने का दावा कर रहे हैं। अब इस मामले में जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी। करीब 28 लाख रुपये की लागत वाली इन परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति और भुगतान प्रक्रिया से जुड़े सवालों का समाधान जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के जरिए ही सामने आ सकेगा।

Suresh Momiya, Jhalawar

Suresh Momiya, Jhalawar

नाम: सुरेश कुमार गोयल (मोमिया)

वर्तमान पद: सीनियर पत्रकार (प्रातःकाल)

कार्यक्षेत्र: झालरापाटन, जिला झालावाड़ (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य महत्वपूर्ण विषय


परिचय

सुरेश कुमार गोयल (मोमिया) राजस्थान के झालावाड़ जिले के झालरापाटन क्षेत्र के एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' में सीनियर पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं। वह झालरापाटन और झालावाड़ जिले से जुड़ी राजनीति, अपराध (क्राइम), शिक्षा, स्वास्थ्य सहित विभिन्न प्रकार की क्षेत्रीय और जनहित की खबरों को नियमित रूप से कवर करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव 

पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों का एक लंबा और व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' के साथ-साथ निम्नलिखित समाचार पत्रों के लिए भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं:

  • दैनिक बढ़ता राजस्थान
  • दैनिक कोटा ब्यूरो
  • दैनिक दो गज दूरी

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।

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