झालावाड़ मेडिकल कॉलेज में बड़े बदलाव की आहट: भ्रष्टाचार पर प्रहार के बीच हेमराज मीणा संभालेंगे कमान, अब क्या बदलेगी अस्पताल की तस्वीर?
झालावाड़ मेडिकल कॉलेज में वित्तीय अनियमितताओं के खुलासे के बाद सरकार का बड़ा एक्शन; हेमराज मीणा नियुक्त हुए नए लेखाधिकारी। डीन डॉ. संजय पोरवाल भ्रष्टाचार मिटाने और एन्जियोग्राफी मशीन लाने के लिए प्रयासरत। क्या निजी अस्पतालों के खेल और टेंडर घोटाले पर लगेगी लगाम? झालावाड़ स्वास्थ्य सेवाओं में बदलाव की पूरी रिपोर्ट।

झालावाड़। झालावाड़ मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की व्यवस्थाओं में व्याप्त कथित वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के बादलों के बीच राजस्थान सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। कॉलेज की लेखा शाखा में चल रही गड़बड़ियों की खबरों पर संज्ञान लेते हुए वित्त राजस्व विभाग ने कड़ा एक्शन लिया है। विभाग द्वारा २१ जनवरी को जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, अतिरिक्त कोषाधिकारी (कोषालय) हेमराज मीणा को अब झालावाड़ मेडिकल कॉलेज में नए लेखाधिकारी के रूप में पदस्थापित किया गया है। शासन के इस फैसले को संस्थान में पारदर्शिता लाने और वित्तीय अनुशासन बहाल करने की दिशा में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।
इस प्रशासनिक फेरबदल के साथ ही मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. संजय पोरवाल की कार्यशैली और उनके विजन की चर्चा भी जोरों पर है। डॉ. पोरवाल का स्पष्ट लक्ष्य मेडिकल छात्रों को उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है, ताकि यहां से निकलने वाले चिकित्सक देश के कोने-कोने में संस्थान की उत्कृष्टता की छाप छोड़ सकें। हालांकि, अस्पताल प्रशासन के सामने भ्रष्टाचार की जड़ें काफी गहरी हैं, जिन्हें उखाड़ फेंकने के लिए डॉ. पोरवाल निरंतर प्रयासरत हैं। जटिलताओं और बड़ी समस्याओं के बावजूद, उनकी निष्ठा एक स्वच्छ और जवाबदेह तंत्र विकसित करने की ओर अग्रसर है।
झालावाड़ की जनता के लिए इस समय सबसे बड़ी आवश्यकता एन्जियोग्राफी मशीन की है। वर्तमान में इस सुविधा के अभाव का फायदा पड़ोसी शहर कोटा के निजी अस्पताल उठा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, मजबूरी में मरीजों को कोटा भेजा जाता है, जहां अक्सर निजी अस्पतालों द्वारा एन्जियोग्राफी के बाद मरीज की स्थिति को अत्यंत गंभीर बताकर उन्हें महंगे स्टेंट डलवाने या बाईपास सर्जरी के लिए विवश किया जाता है। घबराहट में परिजनों को लाखों रुपये खर्च करने पड़ते हैं, जबकि कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां अन्य बड़े शहरों के विशेषज्ञों ने उन्हीं रिपोर्टों के आधार पर केवल दवाओं से मरीज का सफल उपचार किया है। यदि डीन डॉ. संजय पोरवाल व्यक्तिगत रुचि लेकर झालावाड़ में ही एन्जियोग्राफी मशीन स्थापित करवाते हैं, तो यह न केवल जनता के धन और समय की बचत करेगा, बल्कि निजी अस्पतालों के इस संगठित खेल पर भी लगाम लगाएगा।
इसके साथ ही, अस्पताल में होने वाली खरीद प्रक्रियाओं पर भी सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। विशेषकर अस्थि विभाग (ऑर्थोपेडिक्स) में उपयोग होने वाली सामग्री जैसे 'इंस्ट्रूमेंट्स', कॉटन, स्लाइड और अन्य दैनिक उपभोग की वस्तुओं के टेंडर में बड़े घोटाले की आशंका जताई जा रही है। यदि देश की किसी प्रतिष्ठित स्वतंत्र टीम से इन सामग्रियों की गुणवत्ता, खरीद दर और संख्या का निष्पक्ष मूल्यांकन कराया जाए, तो एक बड़ा वित्तीय घोटाला उजागर हो सकता है। झालावाड़ की जनता अब नए लेखाधिकारी हेमराज मीणा और डीन डॉ. संजय पोरवाल की जुगलबंदी से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और भ्रष्टाचार के खात्मे की उम्मीद लगाए बैठी है।

Pratahkal Bureau
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