झालरापाटन के शर्मा परिवार ने पेश की मानवता की मिसाल: मकर संक्रांति पर लिया नेत्रदान का महासंकल्प

झालरापाटन। दान और पुण्य के महापर्व मकर संक्रांति के पावन अवसर पर झालरापाटन के एक प्रतिष्ठित परिवार ने समाज के सामने मानवता और सेवा की एक ऐसी अनुपम मिसाल पेश की है, जिसकी गूँज पूरे क्षेत्र में सुनाई दे रही है। शहर के निवासी ललित शर्मा और उनकी पत्नी शीला शर्मा ने मृत्यु के पश्चात अपनी आँखों को दान करने का संकल्प लेकर न केवल इस पर्व की सार्थकता को बढ़ाया है, बल्कि अंधकारमय जीवन जी रहे लोगों के लिए उम्मीद की एक नई किरण भी जगाई है। यह निर्णय किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि पूरे परिवार की सामूहिक सहमति और पवित्र सोच का परिणाम है।

इस पुण्य कार्य की पृष्ठभूमि तब तैयार हुई जब ललित शर्मा और शीला शर्मा ने अपने बच्चों—पुत्र रोहित, पुत्रवधू स्वाति और पुत्री श्रुति—के सामने अपनी इच्छा प्रकट की। परिवार के सभी सदस्यों ने न केवल इस विचार का स्वागत किया, बल्कि अपनी पूर्ण सहमति देकर इस पहल को एक पारिवारिक उत्सव में बदल दिया। मकर संक्रांति के शुभ मुहूर्त पर मंजू श्री संस्थान और शाइन इंडिया फाउंडेशन के सहयोग से इस संकल्प पत्र को भरने की औपचारिक प्रक्रिया पूरी की गई।

नेत्रदान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए ललित शर्मा ने भावुक स्वर में कहा कि यदि हमारी मृत्यु के पश्चात हमारी आँखें किसी की दुनिया को रोशन कर सकती हैं और किसी दृष्टिहीन के जीवन में खुशियाँ ला सकती हैं, तो इससे बड़ा दान और कोई नहीं हो सकता। वहीं, शीला शर्मा ने बताया कि झालरापाटन में हाल ही में हुए नेत्रदान की प्रेरक खबरों ने उन्हें इस दिशा में कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने गहराई से इस प्रक्रिया के बारे में जानकारी जुटाई और फिर इस पावन संकल्प को आत्मसात किया।

इस पुनीत कार्य को संपन्न कराने के लिए शाइन इंडिया के ज्योति मित्र और मंजूश्री संस्थान के प्रतिनिधि अजय गोयल (मोमिया) विशेष रूप से शर्मा परिवार के निवास स्थान पर पहुँचे। उन्होंने विधिवत रूप से संकल्प पत्र भरवाए और इस पहल की सराहना करते हुए इसे 'एक परिवार की पवित्र पहल' करार दिया। अजय गोयल ने विश्वास जताया कि शर्मा परिवार का यह साहसिक और सेवाभावी निर्णय समाज के अन्य वर्गों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा, जिससे भविष्य में नेत्रदान के प्रति जन-जागरूकता में और अधिक वृद्धि होगी।

झालरापाटन शहर धीरे-धीरे अंगदान और नेत्रदान के क्षेत्र में एक अग्रणी केंद्र के रूप में उभर रहा है। स्थानीय गणमान्य नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के सक्रिय सहयोग का ही परिणाम है कि अब तक शहर में 13 पुण्यात्माओं का नेत्रदान सफलतापूर्वक संपन्न हो चुका है। इसके साथ ही, अब तक 5 व्यक्तियों ने देहदान और 60 जागरूक नागरिकों ने नेत्रदान के संकल्प पत्र भरकर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई है। शर्मा परिवार का यह योगदान इस कड़ी में एक स्वर्णिम अध्याय की तरह जुड़ गया है, जो बताता है कि संस्कारों की असली पूँजी दूसरों के काम आने में ही निहित है।

Pratahkal Bureau

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