भवानी मंडी: एसआरजी अस्पताल के डॉक्टरों ने महिला के पेट से निकाला बालों का गुच्छा
25 वर्षीय महिला के पेट से सर्जरी के जरिए 20x18 सेमी का ट्राइकोबेज़ोअर निकाला गया, दुर्लभ बीमारी के बाद मरीज की स्थिति अब स्थिर है।

भवानी मंडी के एसआरजी अस्पताल में 25 वर्षीय महिला का सफल ऑपरेशन करने वाली सर्जिकल और एनेस्थीसिया टीम, जिन्होंने मरीज के पेट से दुर्लभ ट्राइकोबेज़ोअर (बालों का गुच्छा) निकाला।
भवानी मंडी। श्री छतरपुरा निवासी 25 वर्षीय महिला ममता, जो पिछले 3 महीनों से लगातार पेट दर्द, भूख में कमी, पेट में भारीपन एवं समय-समय पर उल्टी की गंभीर शिकायतों से जूझ रही थीं, का एसआरजी अस्पताल में दुर्लभ बीमारी “ट्राइकोबेज़ोअर” का सफल ऑपरेशन कर जीवनरक्षक उपचार किया गया।
स्थिति गंभीर होने पर ममता को एसआरजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां विस्तृत जांच एवं सोनोग्राफी/सीटी स्कैन के बाद चिकित्सकों ने उनके पेट (स्टमक) में लगभग 20 × 18 सेमी आकार का विशाल ट्राइकोबेज़ोअर (बालों का गुच्छा) पाया। चिकित्सकों के अनुसार ट्राइकोबेज़ोअर एक अत्यंत दुर्लभ स्थिति है, जिसमें मरीज द्वारा लंबे समय तक बाल निगलने (ट्राइकोफेजिया) के कारण पेट में बालों का बड़ा गुच्छा बन जाता है। यह धीरे-धीरे बढ़कर पाचन तंत्र में रुकावट, अल्सर, खून की कमी, उल्टी तथा कभी-कभी आंतों में अवरोध जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न कर सकता है। कई मामलों में यह “रापुंज़ेल सिंड्रोम” का रूप भी ले सकता है, जिसमें बालों का गुच्छा पेट से आंतों तक फैल जाता है।
मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल ऑपरेशन का निर्णय लिया गया। एसआरजी अस्पताल की सर्जिकल टीम—डॉ. संजय पोरवाल, डॉ. शकील अहमद, डॉ. अभिषेक शर्मा एवं डॉ. रजत सिंह स्नेही—द्वारा सफलतापूर्वक सर्जरी कर पेट से विशाल ट्राइकोबेज़ोअर को निकाला गया। एनेस्थीसिया टीम में डॉ. संजीव गुप्ता, डॉ. प्रीति एवं डॉ. अंकिता मीणा शामिल रहे, जिनकी सतर्कता से ऑपरेशन सुरक्षित रूप से संपन्न हुआ।
ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति स्थिर बताई गई है और वह धीरे-धीरे स्वस्थ हो रही है। चिकित्सकों ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में सर्जरी के बाद मनोवैज्ञानिक परामर्श (काउंसलिंग) भी अत्यंत आवश्यक होता है, ताकि मरीज भविष्य में बाल खाने की आदत से बच सके और बीमारी की पुनरावृत्ति न हो।
यह सफल उपचार इस तथ्य को रेखांकित करता है कि समय पर पहचान, सटीक जांच और अनुभवी चिकित्सकों की समन्वित टीम के प्रयासों से जटिल एवं दुर्लभ बीमारियों का भी प्रभावी और सुरक्षित उपचार संभव है।

Suresh Momiya, Jhalawar
नाम: सुरेश कुमार गोयल (मोमिया)
वर्तमान पद: सीनियर पत्रकार (प्रातःकाल)
कार्यक्षेत्र: झालरापाटन, जिला झालावाड़ (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य महत्वपूर्ण विषय
परिचय
सुरेश कुमार गोयल (मोमिया) राजस्थान के झालावाड़ जिले के झालरापाटन क्षेत्र के एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' में सीनियर पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं। वह झालरापाटन और झालावाड़ जिले से जुड़ी राजनीति, अपराध (क्राइम), शिक्षा, स्वास्थ्य सहित विभिन्न प्रकार की क्षेत्रीय और जनहित की खबरों को नियमित रूप से कवर करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव
पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों का एक लंबा और व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' के साथ-साथ निम्नलिखित समाचार पत्रों के लिए भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं:
- दैनिक बढ़ता राजस्थान
- दैनिक कोटा ब्यूरो
- दैनिक दो गज दूरी
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।
