देर रात संपन्न हुआ सेवानिवृत्त शिक्षक का नेत्रदान, कोटा से आई टीम ने झालरापाटन में दी जीवन की नई रोशनी
झालरापाटन में सेवानिवृत्त शिक्षक एवं सुश्रावक कल्याणमल जैन के निधन के बाद देर रात नेत्रदान संपन्न हुआ। 100 किलोमीटर दूर कोटा से आई चिकित्सकीय टीम ने परिवार की उपस्थिति में नेत्र संकलन किया। यह नेत्रदान सेवा, त्याग और मानवता का प्रेरणादायी उदाहरण बना।

झालरापाटन। सेवा, त्याग और परोपकार के मूल्यों को जीवन भर आत्मसात करने वाले लालबाग निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक एवं सुश्रावक कल्याणमल जैन का सोमवार शाम हृदय गति रुकने से आकस्मिक निधन हो गया। उनके निधन के साथ ही परिवार ने एक ऐसा निर्णय लिया, जिसने शोक की घड़ी को मानवता और करुणा के संदेश में बदल दिया। देर रात उनके नेत्रदान के माध्यम से उन्होंने मृत्यु के बाद भी किसी के जीवन में उजाला फैलाने का संकल्प पूरा किया।
जैन धर्म के सिद्धांतों के अनुरूप सादगी और संयमपूर्ण जीवन जीने वाले कल्याणमल जैन प्रारंभ से ही साधु-संतों की सेवा, धर्म ध्यान और सामाजिक कर्तव्यों के प्रति समर्पित रहे। उनकी पत्नी लक्ष्मीबाई जैन ने बताया कि बीते लगभग बीस वर्षों से वे एक जैन मुनि की तरह त्याग और तपस्या का जीवन व्यतीत कर रहे थे। समाज और शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहा।
उनके सामाजिक दायित्वों और जीवन मूल्यों को ध्यान में रखते हुए पुत्र अशोक, ललित तथा पुत्रियां कोकिला, आशा और इंद्रा ने नेत्रदान का निर्णय लिया। परिवार का मानना था कि जिस प्रकार कल्याणमल जैन ने अपने जीवनकाल में हजारों विद्यार्थियों को ज्ञान का प्रकाश दिया, उसी प्रकार उनका अंतिम कार्य भी किसी जरूरतमंद को नई दृष्टि प्रदान करे।
परिजनों की इच्छा को साकार करने के लिए पोते शुभम और मोहित ने संस्था शाइन इंडिया के ज्योति मित्र नितेश एवं मंजूश्री संस्थान के संस्थापक अजय मोमिया से संपर्क किया। सूचना मिलते ही कोटा से डॉ. कुलवंत गौड़ के नेतृत्व में नेत्र संकलन वाहिनी ‘ज्योतिरथ’ रात लगभग 11 बजे झालरापाटन पहुंची। परिवार के सदस्यों की उपस्थिति में विधिवत प्रक्रिया के तहत कल्याणमल जैन के नेत्रों का सफलतापूर्वक संकलन किया गया।
इस अवसर पर परिजनों ने संतोष व्यक्त किया कि कल्याणमल जैन का संपूर्ण जीवन समाज और राष्ट्र के लिए समर्पित रहा। उनके द्वारा शिक्षित विद्यार्थी आज देश के विभिन्न हिस्सों में शीर्ष पदों पर रहकर समाज और राष्ट्र के उत्थान में योगदान दे रहे हैं। उनका यह अंतिम दान न केवल किसी के जीवन को नई दृष्टि देगा, बल्कि समाज में नेत्रदान के प्रति जागरूकता और प्रेरणा का सशक्त संदेश भी छोड़ गया।

Pratahkal Bureau
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