झालरापाटन। राजस्थान के इस शहर में नालों और सार्वजनिक मार्गों पर हो रहे अतिक्रमण और अनियंत्रित निर्माण ने स्थानीय नागरिकों की परेशानी बढ़ा दी है। शहर के विभिन्न हिस्सों में आरसीसी निर्माण कर नाले पर कब्जा करने की घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं, जबकि नगरपालिका और संबंधित अधिकारी इस ओर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं।

हाल ही में एक संगठन के बड़े नेता की शिकायत पर गिन्दौर के बाहर सर्विस रोड पर लगी अस्थाई दुकानों को केवल दो घंटे में हटाया गया। यह कार्रवाई विशेष सुविधा और दबाव में हुई, क्योंकि उस अधिकारी को रोड़ से अपने घर तक जाने में असुविधा थी। इसके बावजूद, नगर के अन्य अतिक्रमण यथावत बने हुए हैं, जिससे जनता का रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हो रहा है।

सबसे गंभीर मामला वसुन्धरा कालोनी और इमली गेट के पास सामने आया है, जहाँ नाले पर करीब छह से सात फुट चौड़ा आरसीसी निर्माण प्रारंभ कर दिया गया है। यह निर्माण शनि मंदिर के समीप रियासत कालीन क्षेत्र में हो रहा है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, अतिक्रमण की अनुमति और निर्माण में किसी तरह का लेन-देन हुआ या नहीं, इसकी जानकारी स्पष्ट नहीं है।

स्थानीय प्रशासन और अतिक्रमण दस्ता इस मामले में गायब हैं। ईओ और नगर पालिका के अन्य अधिकारी भी कथित तौर पर सक्रिय नहीं हैं। वहीं, नगर पालिका के अध्यक्ष अंतिम दिनों में अपने कार्यकाल में माल-संपत्ति संजोने में व्यस्त हैं। ऐसे में शहरवासियों की परेशानी बढ़ती जा रही है और अतिक्रमण की घटनाओं पर नियंत्रण नहीं दिख रहा।

स्थानीय नागरिकों की शिकायत है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो सार्वजनिक संपत्ति और नालों पर बढ़ते अतिक्रमण से शहर में गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। नगर निगम की उदासीनता और अनियमित कार्रवाई इस मुद्दे को और जटिल बना रही है।

Pratahkal Bureau

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