झालावाड़ जिले के इकलेरा कस्बे में पर्यावरण संरक्षण के दावों के बीच एक भयावह विरोधाभास सामने आया है। एक ओर सरकारी और सामाजिक मंचों से पौधारोपण और हरियाली का संदेश दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर रात के अंधेरे में खनन माफिया पहाड़ियों को छलनी कर प्रकृति की जड़ों पर वार कर रहे हैं। मोरेली सरकारी अस्पताल के पीछे और रीछवा गांव मार्ग पर स्थित देवनारायण की पहाड़ी अवैध खनन का बड़ा केंद्र बनती जा रही है, जहां मशीनों की गूंज और डम्परों की आवाज़ रात से सुबह तक सुनाई देती है।

स्थानीय लोगों के अनुसार खनन माफिया बिना किसी अनुमति के भारी मशीनें लगाकर मुर्रम और पत्थर का उत्खनन कर रहे हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि पहाड़ी पर स्थित मंदिर की नींव तक खतरे में आ गई है। लगातार खुदाई के कारण पहाड़ी का संतुलन बिगड़ रहा है, जिससे मंदिर गिरने और आसपास की आबादी को जान-माल के नुकसान की आशंका बढ़ गई है। इसके बावजूद अवैध खनन का यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रविवार को एक टीम ने क्षेत्र का निरीक्षण किया, जिसमें बड़े पैमाने पर मुर्रम खनन की पुष्टि हुई। पहाड़ियों को खोदकर खनिज संपदा को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, लेकिन संबंधित विभागों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि रात के समय नगर से होकर मुर्रम से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां और डम्पर गुजरते हैं, जो झालावाड़ रोड पर कॉलोनियों में प्लॉटिंग के लिए उपयोग की जाती है। कम लागत में सड़क निर्माण के लिए मुर्रम डलवाई जाती है, लेकिन इसके स्रोत और वैधता पर कोई सवाल नहीं उठाता।

क्षेत्रवासियों का आरोप है कि खनन माफिया के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें न तो खनिज विभाग का डर है और न ही वन विभाग का। जानकारों के अनुसार माफिया के तार संबंधित अधिकारियों तक जुड़े होने की चर्चा आम है, जिसके चलते यह गोरखधंधा खुलेआम फल-फूल रहा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब हजारों लोगों को इस अवैध गतिविधि की जानकारी है, तो पुलिस का बीट सिस्टम और मुखबिर तंत्र क्यों निष्क्रिय दिखाई दे रहा है।

झालावाड़ रोड और रीछवा मार्ग से गुजरने वाले लोग अवैध खनन परिवहन से परेशान हैं। रोक के बावजूद प्रतिदिन सैकड़ों चक्कर ट्रैक्टर और डम्पर लगाते हैं, जो गली-मोहल्लों और मुख्य सड़कों से होकर गुजरते हैं। इसके बावजूद पुलिस, परिवहन, खनन और वन विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं कि क्या उनकी शह पर यह अवैध खनन जारी है।

प्रशासनिक उदासीनता और बेलगाम खनन के चलते न केवल पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुंच रही है, बल्कि धार्मिक स्थलों और आमजन की सुरक्षा भी दांव पर लगी हुई है। यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले समय में यह संकट और गहरा सकता है।

Pratahkal Bureau

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