पिपलोदी स्कूल कांड को पूरे बारह माह बीत चुके हैं, लेकिन एक साल पहले उठे सवाल आज भी उतनी ही मजबूती से खड़े हैं। जिस घटना ने पूरे जिले को झकझोर दिया था, वह आज भी लोगों की स्मृतियों में ताजा बनी हुई है। जनता की निगाहें अब भी इस बात पर टिकी हैं कि आखिर इस मामले की अंतिम तस्वीर कब सामने आएगी।

घटना के बाद जांच, कार्रवाई और जवाबदेही के कई दावे किए गए थे। प्रशासनिक अधिकारियों ने दौरे किए, जांच समितियां गठित की गईं और आश्वासन दिए गए कि दोषी कोई भी हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन समय बीतने के साथ लोगों के मन में यह प्रश्न और गहरा होता गया कि जांच आखिर किस मुकाम पर पहुंची है और उसका निष्कर्ष क्या रहा।

किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्याय केवल किया जाना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उसका समय पर दिखाई देना भी उतना ही आवश्यक माना जाता है। जब चर्चित मामलों की जांच लंबी खिंचती है तो अफवाहों को जगह मिलती है और जनता का विश्वास कमजोर पड़ने लगता है।

पिपलोदी स्कूल कांड की पहली बरसी केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही की भी कसौटी बन गई है। यदि जांच पूरी हो चुकी है तो उसके तथ्य सार्वजनिक होने चाहिए, और यदि अभी भी लंबित है तो जनता को इसकी स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए। पारदर्शिता ही विश्वास की सबसे बड़ी आधारशिला मानी जाती है।

आज आवश्यकता किसी पर बिना प्रमाण आरोप लगाने की नहीं, बल्कि सत्य को सामने लाने की है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए, और यदि आरोप निराधार हैं तो वह भी स्पष्ट रूप से सामने आना चाहिए। न्याय का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि सत्य की स्थापना करना भी है।

बारह माह बाद भी जनता की निगाहें उसी प्रश्न पर टिकी हैं कि क्या पिपलोदी स्कूल कांड को उसका तार्किक और न्यायपूर्ण निष्कर्ष मिलेगा, या यह मामला भी फाइलों के ढेर में दबकर रह जाएगा। इसका उत्तर समय नहीं, बल्कि जिम्मेदार संस्थाओं की पारदर्शी और निष्पक्ष कार्रवाई ही देगी।

Suresh Momiya, Jhalawar

Suresh Momiya, Jhalawar

नाम: सुरेश कुमार गोयल (मोमिया)

वर्तमान पद: सीनियर पत्रकार (प्रातःकाल)

कार्यक्षेत्र: झालरापाटन, जिला झालावाड़ (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य महत्वपूर्ण विषय


परिचय

सुरेश कुमार गोयल (मोमिया) राजस्थान के झालावाड़ जिले के झालरापाटन क्षेत्र के एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' में सीनियर पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं। वह झालरापाटन और झालावाड़ जिले से जुड़ी राजनीति, अपराध (क्राइम), शिक्षा, स्वास्थ्य सहित विभिन्न प्रकार की क्षेत्रीय और जनहित की खबरों को नियमित रूप से कवर करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव 

पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों का एक लंबा और व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' के साथ-साथ निम्नलिखित समाचार पत्रों के लिए भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं:

  • दैनिक बढ़ता राजस्थान
  • दैनिक कोटा ब्यूरो
  • दैनिक दो गज दूरी

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।

Next Story