झालावाड़/भवानीमंडी। भवानीमंडी स्थित पद्मावत रिसोर्ट मैरिज गार्डन के संचालन में नियमों की जमकर अनदेखी की जा रही है। यह गार्डन बिना अनुमति, बिना भूरूपांतरण और पूर्णतः व्यवसायिक दृष्टिकोण से संचालित किया जा रहा है, जिसके कारण अब इस पर ताला लगने के आसार नजर आ रहे हैं।


तहसीलदार पचपहाड़ की कड़ी कार्यवाही

तहसीलदार पचपहाड़ द्वारा इस मामले में राजस्थान काश्तकारी अधिनियम की धारा 175 और 177 के तहत कार्यवाही शुरू की गई है। जारी आदेशों के अनुसार:

  • वादग्रस्त भूमि को तुरंत "सिवाय चक" (सरकारी भूमि) घोषित करने की प्रक्रिया की जाए।
  • मैरिज गार्डन पर ताला लगाकर इसे कुर्क किया जाए।
  • अथवा इसे विधि सम्मत तरीके से ध्वस्त करने के आदेश जारी कर "सरकार बनाम भेरूलाल" का मामला दर्ज कर लिया गया है।

इसके चलते पद्मावत मैरिज गार्डन कभी भी बंद हो सकता है और इस पर संकट के बादल छाए हुए हैं।


आरटी एक्ट 1955 की धारा 177 के अंतर्गत वाद पत्र

तहसीलदार पचपहाड़ ने न्यायालय उपखण्ड अधिकारी भवानीमंडी कार्यालय में आरटी एक्ट 1955 की धारा 177 के तहत वाद पत्र प्रस्तुत किया है। रिपोर्ट के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • पटवारी व कानूनगो की रिपोर्ट के अनुसार, भूमि पर काश्त (खेती) नहीं की जा रही है।
  • अन्य व्यक्ति सिद्धांत जैन द्वारा इस वादग्रस्त भूमि पर मैरिज गार्डन व रिसोर्ट बनाकर कृषि भूमि का अकृषि उपयोग किया जा रहा है।
  • अब यह भूमि कृषि प्रयोजन की नहीं रही है।
  • खातेदार भेरूलाल की लीज डीड निष्पादित करवाई गई।

नगर पालिका भवानीमंडी से जारी विवाह स्थल अनुमति पत्र, अस्थाई फायर अनापत्ती प्रमाण पत्र और विवाह स्थल का पंजीयन उप विधि 2010 की जमा रसीद भी न्यायालय में प्रस्तुत की गई है।


मास्टर प्लान 2031 की अवहेलना और राजस्व को क्षति

जानकारी के अनुसार, बाईपास पर स्थित कृषि आराजी खाता संख्या 250 के खसरा नंबर 469 (रकबा 1.5553 हेक्टेयर) की भूमि भेरूलाल पुत्र मांगीलाल, जाति कुलमी पाटीदार, निवासी भवानीमंडी के नाम दर्ज है।

"मास्टर प्लान 2031 के अनुसार यह खेल संकुल की जमीन है जो कि जनहित से जुड़ा हुआ मामला है। इसके बावजूद नगर पालिका भवानीमंडी की बिना अनुमति और बिना व्यवसायिक रूपांतरण के पद्मावत रिसोर्ट का निर्माण व संचालन कर मास्टर प्लान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।"

इस अवैध संचालन से राजस्व को भारी क्षति हो रही है और आरोप है कि इस खेल में क्षेत्र के भूमाफिया भी लिप्त हैं।


आरटीआई और प्रशासनिक सुस्ती पर सवाल

नगर पालिका ने सूचना के अधिकार (RTI) का मखौल उड़ाते हुए जवाब दिया कि "सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा के अंतर्गत व्यापक जनहित होने की स्थिति में सूचना नहीं दी जा सकती।" इससे यह प्रतीत होता है कि इस मामले में "हमाम में सभी नंगे हैं"। पूर्व में महासचिव नगर कांग्रेस द्वारा दिया गया प्रार्थना पत्र भी फाइलों में दबकर रह गया।


जिला कलेक्टर का आदेश भी साबित हुआ "हवाई घोड़ा"

जिला कलेक्टर झालावाड़ ने आदेश क्रमांक 2020/सतर्कता/474 (दिनांक 30 जुलाई 2020) के माध्यम से सतर्कता प्रकरण दर्ज कर अवैध संचालन पर पाबंदी लगाने और राजस्व नुकसान से बचाने हेतु अधिशाषी अधिकारी नगर पालिका भवानीमंडी को पत्र प्रेषित किया था। परंतु, यह आदेश मात्र "हवाई घोड़ा" साबित हुआ और जमीन पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई।


हमाम में सभी नंगे हैं या रसूख की चौखट पर दम तोड़ रहा कानून?

मामले की गंभीरता को दर्शाते हुए तहसीलदार पचपहाड़ ने स्पष्ट उल्लेख किया है कि खसरा नंबर 469 का उपयोग मैरिज गार्डन के रूप में हो रहा है। इसके बावजूद निम्नलिखित स्थितियां बनी हुई हैं:

  • बिना अनुमति रिसोर्ट निर्माण और संचालन।
  • बिना व्यवसायिक परिवर्तन के 70 कमरों का निर्माण।
  • गिदावरी रिपोर्ट में "उड़द की फसल" दर्शाया जाना (जबकि वहां रिसोर्ट है)।
  • जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा गलत जानकारी देना।

यह सब देखकर लगता है कि सभी जिम्मेदार अधिकारी व इसमें लिप्त अन्य माफिया "हमाम में सभी नंगे हैं" या फिर कानून रसूख की चौखट पर दम तोड़ता हुआ दिखाई दे रहा है।

Pratahkal Bureau

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