झालरापाटन। सरकारी जनकल्याणकारी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत आम जनता को मुफ्त जांच और दवाइयां उपलब्ध कराने का उद्देश्य सरकार की ओर से व्यापक स्तर पर लागू किया गया है, लेकिन हाल ही में इस योजना में बड़े पैमाने पर घोटाले का मामला सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, झालावाड़ के कुछ निजी अस्पतालों ने इस योजना का गलत फायदा उठाते हुए लाखों रुपए की सरकारी धनराशि का दुरुपयोग किया है।

जानकारी के अनुसार, इन निजी अस्पतालों ने गांव-गांव में शिविर लगाकर ग्रामीणों को बीमार बताए जाने का बहाना बनाकर अपने नर्सिंग होम में भर्ती किया। वहां बिमारी के इलाज का दिखावा कर सरकारी जनहितकारी योजनाओं के तहत भारी राशि गैरकानूनी रूप से वसूली गई।

झालावाड़ पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने इस घोटाले को लेकर “आपरेशन शटरडाउन” नामक कार्रवाई में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उनके अनुसार, फिलहाल जिले में केवल इस घोटाले का पांच प्रतिशत ही सामने आया है। यदि पूरे देश के अन्य जिलों में इसी तरह की जांच की जाए, तो बड़ी मात्रा में सरकारी धन की हानि और घोटाले की पूरी तस्वीर उजागर हो सकती है।

साथ ही, जांच में यह भी सामने आया कि मस्टर रोल और मनरेगा श्रमिकों के भुगतान में गंभीर अनियमितताएं हो रही हैं। कई जगह मस्टर रोल पर नाम गलत तरीके से दर्ज किए गए, काम की आधी राशि तुरंत दे दी गई और बाद में सरपंच, ग्राम सेवक, पोश मशीन तथा ई-मित्र संचालक के माध्यम से राशि श्रमिकों के अंगूठे के माध्यम से निकाली गई। इस प्रक्रिया में श्रमिकों की सहमति ली जाती रही, लेकिन करोड़ों रुपए की हेराफेरी हुई।

पंचायत समिति डग की ग्राम पंचायतों में पिछले आठ-नौ महीनों में हजारों श्रमिकों की मस्टर रोल में करोड़ों रुपए का भुगतान किया गया। फोटो और दस्तावेजों के आधार पर जांच में यह भी पता चला कि बच्चों को श्रमिक बनाकर मनरेगा पोर्टल पर अपलोड किया गया। हालांकि, यह अनियमितता अब बंद कर दी गई है।

विकास अधिकारियों को बार-बार इस मामले में अवगत कराया गया, लेकिन मस्टर रोल को शून्य करने के बजाय करोड़ों रुपए का भुगतान जारी रहा। अब सवाल यह उठता है कि क्या इस बड़े घोटाले में शामिल जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होगी और सरकारी धन की वसूली की जाएगी।

इस मामले का व्यापक असर प्रशासन और जनता दोनों पर पड़ सकता है। यदि सही कार्रवाई नहीं हुई तो यह न केवल सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता को प्रभावित करेगा, बल्कि आम नागरिकों के हितों को भी गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।

Suresh Momiya, Jhalawar

Suresh Momiya, Jhalawar

नाम: सुरेश कुमार गोयल (मोमिया)

वर्तमान पद: सीनियर पत्रकार (प्रातःकाल)

कार्यक्षेत्र: झालरापाटन, जिला झालावाड़ (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य महत्वपूर्ण विषय


परिचय

सुरेश कुमार गोयल (मोमिया) राजस्थान के झालावाड़ जिले के झालरापाटन क्षेत्र के एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' में सीनियर पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं। वह झालरापाटन और झालावाड़ जिले से जुड़ी राजनीति, अपराध (क्राइम), शिक्षा, स्वास्थ्य सहित विभिन्न प्रकार की क्षेत्रीय और जनहित की खबरों को नियमित रूप से कवर करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव 

पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों का एक लंबा और व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' के साथ-साथ निम्नलिखित समाचार पत्रों के लिए भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं:

  • दैनिक बढ़ता राजस्थान
  • दैनिक कोटा ब्यूरो
  • दैनिक दो गज दूरी

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।

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