झालरापाटन। सांप्रदायिक सद्भाव और मानवता की एक अनुकरणीय मिसाल पेश करते हुए झालरापाटन निवासी योगिता कुमावत ने ईद-उल-अजहा के अवसर पर रक्तदान कर एक मुस्लिम युवक का जीवन बचाकर त्योहार की खुशियों को दोगुना कर दिया। एसआरजी अस्पताल में उपचाररत मुस्लिम युवक याकूब मंसूरी को प्लेटलेट्स की अत्यंत आवश्यकता थी। याकूब के शरीर में प्लेटलेट्स का स्तर घटकर मात्र 28,000 रह गया था, जिससे उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई थी। इस आपातकालीन परिस्थिति की सूचना मंजुश्री संस्थान के माध्यम से योगिता कुमावत तक पहुंची, जो क्षेत्र में रक्तदान और सामाजिक कार्यों के लिए निरंतर तत्पर रहती हैं।

मानवीय संवेदनाओं को सर्वोपरि मानते हुए योगिता कुमावत ने सेवा को ही परम धर्म माना और तत्काल रुधिरा ब्लड सेंटर पहुंचीं। वहां उन्होंने रक्तदान कर याकूब मंसूरी को जीवनदान दिया। इस पुनीत कार्य से जहां एक ओर युवक के परिजनों के चेहरे पर मुस्कान लौटी, वहीं त्योहार के दिन किसी के जीवन को बचाने का यह कदम समाज के लिए एक प्रेरणा बन गया है। उल्लेखनीय है कि योगिता कुमावत अब तक 10 बार रक्तदान कर चुकी हैं, और यह उनके जीवन का पहला एडीसीपी (ADCP) डोनेशन था। इस घटना ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया है कि मानवता का धर्म किसी भी त्योहार और मजहब से कहीं ऊपर होता है।

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