झालरापाटन: सालरिया में भ्रष्टाचार का 'श्मशान', कागजों में विकास और धरातल पर लूट का खेल
झालरापाटन की सालरिया ग्राम पंचायत में श्मशान विकास के नाम पर लाखों के गबन का मामला सामने आया है। श्री देव नारायण कंस्ट्रक्शन को हुए भुगतान और फर्जी मजदूरी के दावों ने सरकारी तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानिए कैसे कागजों में हुआ विकास और हकीकत में हुआ भ्रष्टाचार।

झालरापाटन। राजस्थान सरकार एक ओर जहां विकास कार्यों का ढिंढोरा पीटकर प्रदेश की जनता को सुनहरे सपने दिखा रही है, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के निर्वाचन क्षेत्र झालरापाटन से भ्रष्टाचार की एक ऐसी डरावनी तस्वीर सामने आई है, जिसने व्यवस्था के दावों की पोल खोलकर रख दी है। ग्राम पंचायत सालरिया में श्मशान घाट के विकास के नाम पर लाखों रुपयों का ऐसा "भूतिया" खेल खेला गया है, जहां सरकारी फाइलों में तो निर्माण कार्य चमक रहा है, लेकिन हकीकत में भ्रष्टाचार की दुर्गंध आ रही है।
ग्राम पंचायत सालरिया के इस श्मशान घाट को लेकर जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, इस कार्य के लिए सामग्री आपूर्ति के नाम पर श्री देव नारायण कंस्ट्रक्शन नामक फर्म को 7,37,425 रुपये का भारी-भरकम भुगतान किया गया है। इतना ही नहीं, श्रम मजदूरी के नाम पर भी 2,67,000 रुपये खर्च दिखाए गए हैं। आश्चर्य की बात यह है कि इस कार्य का भुगतान होने से पूर्व सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता द्वारा एमबी (मेज़रमेंट बुक) भी भरी गई और ऑडिट टीम के साथ-साथ सोशल ऑडिट टीम ने भी इसे हरी झंडी दे दी। यानी सरकारी तंत्र की मिलीभगत से इस कार्य को कागजों पर पूरी तरह गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी सिद्ध कर दिया गया।
हालांकि, धरातल पर ग्रामीणों की शिकायतें एक अलग ही कहानी बयां कर रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जिन श्रमिकों के नाम पर मजदूरी का भुगतान उठाया गया है, वे वास्तव में कारीगरी का काम ही नहीं जानते। भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा नमूना श्मशान के स्वागत द्वार में देखने को मिलता है। ग्रामीणों के अनुसार, इस स्वागत द्वार के लिए 3 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे, लेकिन मौके पर मुश्किल से 1 लाख रुपये ही खर्च किए गए। शेष 2 लाख रुपये कहां गायब हो गए, इसका कोई अता-पता नहीं है। जो दरवाजा वहां लगाया गया है, उसकी बाजार कीमत 10 हजार रुपये से अधिक नहीं आंकी जा सकती, जबकि एक आदर्श स्वागत द्वार का स्वरूप वहां नदारद है।
स्थानीय जानकार लोगों और ग्रामीणों का मानना है कि पूरे प्रोजेक्ट में मुश्किल से 4 लाख रुपये का वास्तविक कार्य हुआ है, जबकि बाकी के करीब 7 से 8 लाख रुपये भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए हैं। यह पूरी कवायद अधिकारियों, ठेकेदारों और जिम्मेदार प्रतिनिधियों की मिलीभगत की ओर इशारा करती है। जहां एक ओर सरकार विकास के नाम पर जनता को गुमराह कर रही है, वहीं निर्वाचन क्षेत्र में हो रहे इस गबन ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं। अब देखना यह है कि क्या उच्चाधिकारी इस 'सालरिया घोटाले' की निष्पक्ष जांच कराएंगे या फिर भ्रष्टाचार का यह श्मशान यूं ही फाइलों में दफन रहेगा।

Suresh Momiya, Jhalawar
नाम: सुरेश कुमार गोयल (मोमिया)
वर्तमान पद: सीनियर पत्रकार (प्रातःकाल)
कार्यक्षेत्र: झालरापाटन, जिला झालावाड़ (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य महत्वपूर्ण विषय
परिचय
सुरेश कुमार गोयल (मोमिया) राजस्थान के झालावाड़ जिले के झालरापाटन क्षेत्र के एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' में सीनियर पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं। वह झालरापाटन और झालावाड़ जिले से जुड़ी राजनीति, अपराध (क्राइम), शिक्षा, स्वास्थ्य सहित विभिन्न प्रकार की क्षेत्रीय और जनहित की खबरों को नियमित रूप से कवर करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव
पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों का एक लंबा और व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' के साथ-साथ निम्नलिखित समाचार पत्रों के लिए भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं:
- दैनिक बढ़ता राजस्थान
- दैनिक कोटा ब्यूरो
- दैनिक दो गज दूरी
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।
