भ्रष्टाचार का चरम और बंदरबांट

झालरापाटन पंचायत समिति में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है। जिसमें विगत दो सालों में विकास अधिकारी महेश मीणा के कार्यकाल में रिकार्ड स्तर पर बंदर बांट हुई, विभागीय कार्यवाही व जांच नहीं होना मुर्दा सवाल हैं, किन्तु ए सी बी की टीम विगत पांच सालों में मनरेगा, पंचायत समिति कोष, निजी आय, प्रधान कोष से संपन्न हुए विकास कार्यों के भुगतान बिलों व भौतिक सत्यापन करें तो करोड़ों रुपए का गबन सामने आयेगा।

पंचायत परिसर में 'अनआवश्यक' निर्माण का स्कैम

पंचायत समिति परिसर में विकास कार्यों पर निजी मद व पंचायत कोष से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास करने के स्थान पर परिसर में लाखों रुपए का अनावश्यक निर्माण दिखा बड़ा स्कैम किया है। जिसमें लाखों रुपए का गबन स्पष्ट है। क्या रास्ता अपनाया गया गबन का इसका खुलासा सिलसिलेवार अगले अंकों में प्रकाशित कर जनता व प्रशासन को अवगत करवाएंगे।

भ्रष्टाचार की चौकड़ी और नियमों की धज्जियां

जानकार सूत्र बताते हैं पंचायत समिति को किसी मद से कार्य करवाने के पंचायत समिति के नजदीकी ग्राम पंचायत को कार्य एजेंसी बनाये जाने का प्रावधान है। लेकिन भ्रष्टाचार की चौकड़ी निर्वतमान प्रधान भावना झाला, विकास अधिकारी महेश मीणा, सहायक अभियंता हेमन्त कश्यप व दिनेश पाटीदार की बड़ी भूमिका है, इस चौकड़ी ने षड्यंत्र पूर्वक पंचायत समिति झालरापाटन से लगती ग्राम पंचायत कलमडी कलां, गिरधर पुरा, गोविन्द पुरा खानपुरिया ग्राम पंचायतों को कार्य एजेंसी नहीं बना कर ग्यारह किलोमीटर दूर तितर वासा ग्राम पंचायत को कार्य एजेंसी बनाया गया जो नियम विरुद्ध है। दूसरा यह प्रत्येक ग्राम पंचायत कार्य करवाने में सक्षम है किंतु योजनाबद्ध तरीके से दूसरी ग्राम पंचायतों में भी तितर वासा ग्राम पंचायत को कार्य एजेंसी बनाया गया है। इससे यह ज़ाहिर है कि मिली भगत कर जनता के पैसे लूटें गये है।

कौन हैं तितर वासा ग्राम पंचायत का दलाल?

2020 में संपन्न हुए पंचायत राज विभाग के चुनावों में सरपंच पद पर कालुलाल नामक व्यक्ति सरपंच निर्वाचित होने पर उसने भ्रष्टाचार की दाल नहीं गलने दी उसे योजनाबद्ध तरीके से ए सी बी हाथों रंगीन नोट पकड़ाये। तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी उस भ्रष्टाचार में बराबर का हिस्से दार था लेकिन जांच अधिकारी ने जांच में निर्दोष साबित कर दिया। तितर वासा ग्राम पंचायत में उप सरपंच पद पर राई सिंह गुर्जर था, जिसने किसी भ्रष्टाचारी को घास नहीं डाली बल्कि वो कांटा बन गया था अंततः उसकी संदेहास्पद परिस्थितियों में दुर्घटना में मौत होना कहीं न कहीं तो कहानी है जो किसी के गले नहीं उतरी।

कठपुतली सरपंच और 'भ्रष्ट' ग्राम विकास अधिकारी का खेल

नियमानुसार सरपंच पद पर सारगखेडा की पंच को सरपंच बनाया गया। जो साधारण महिला है उसे यह भी नहीं पता पंचायत में विकास कार्य कौन करवा रहा है, और सरपंच के मायने क्या होते हैं। इस पंचायत में ईमानदार ग्राम विकास अधिकारी आने को तैयार नहीं हुए तो प्रदेश में भ्रष्टाचार करने में अव्वल चन्द्र सिंह झाला को लगाया जो एक दर्जन बार ए पी ओ सस्पेंड हो चुका है।

जांच हो तो इन सब भूमिका में दिनेश पाटीदार की भूमिका होने से इन्कार नहीं किया जा सकता है यहां तक भी जानकारी मिली है कि सरपंच के हस्ताक्षर भी यही करता है। यह भी सच है ग्राम विकास अधिकारी चन्द्र सिंह झाला का तितरवासा से गहरा रिश्ता है। दिनेश पाटीदार की माताजी 2010 के कार्यकाल में सरपंच थी उसी दौरान अपने निजी खेत में नरेगा से तलाई के नाम पर कार्य करवाने में करीब बारह लाख रुपए फर्जी भुगतान चन्द्र सिंह झाला को ग्राम विकास अधिकारी नियुक्त कर किया गया था।

Pratahkal Newsroom

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