झालरापाटन। झालावाड़ जिले के ऐतिहासिक शहर झालरापाटन में चरमराती नागरिक सुविधाओं और सफाई व्यवस्था के ढर्रे को लेकर अब राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। नगर की सड़कों पर पसरी गंदगी, जगह-जगह लगे कचरे के ढेरों और गलियों में स्वच्छंद विचरण करते आवारा सांडों से उत्पन्न होते खतरों को लेकर नगर कांग्रेस कमेटी ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। शुक्रवार को नगर पालिका प्रशासन की कार्यशैली पर गहरा असंतोष व्यक्त करते हुए कांग्रेस पदाधिकारियों ने प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी और जनहित में एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें शहर की सूरत बदलने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की गई है।

नगर अध्यक्ष अम्बेश मीणा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में एकत्रित हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नगर पालिका कार्यालय पहुंचकर अपनी नाराजगी जाहिर की। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि झालरापाटन की स्थिति दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है। शहर के मुख्य मार्ग हों या रिहायशी बस्तियां, हर तरफ कचरे के अंबार ने स्वच्छ भारत के दावों की पोल खोल दी है। इस स्थिति के कारण न केवल दुर्गंध से आमजन का जीना दूभर हो गया है, बल्कि संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा भी गहरा गया है। इसके साथ ही, शहर में आवारा सांडों का बढ़ता आतंक राहगीरों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं घटित हो रही हैं।

इस विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं की भारी मौजूदगी रही। कार्यक्रम में पूर्व नगर अध्यक्ष चंद्र प्रकाश लाल राठौर, नेता प्रतिपक्ष खालिद मोहम्मद, पार्षद नवीन मेघवाल, रिजवान अहमद, कासिम भट्टी, नन्दलाल राठौर, इरफान अली, भैया जोशी, इस्माइल अंसारी, मोनू गुप्ता, प्रणव राठौड़, विकी शर्मा, बृजमोहन रेगर, मनीष खींची, गोलू नामदेव, नरेंद्र, प्रिंस, विक्की सक्सेना, दीपक मीणा, रईसुल्ला और राजेश पाटोंना सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इन सभी नेताओं ने एकजुट होकर नगर पालिका प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया और कहा कि यदि नियमित सफाई व्यवस्था, समय पर कचरा उठाव और आवारा पशुओं के नियंत्रण के लिए प्रभावी कार्ययोजना लागू नहीं की गई, तो कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी।

ज्ञापन के माध्यम से यह अंतिम चेतावनी दी गई है कि यदि आगामी कुछ दिनों के भीतर शहर की व्यवस्थाओं में सुधार नहीं दिखा, तो नगर कांग्रेस कमेटी नगरवासियों के हितों की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्रशासन की शिथिलता ने आम आदमी के जीवन और स्वास्थ्य को संकट में डाल दिया है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब देखना यह है कि इस कड़ी चेतावनी के बाद नगर पालिका प्रशासन गहरी नींद से जागकर शहर की सुध लेता है या झालरापाटन की जनता को आंदोलन की राह देखनी पड़ेगी।

Pratahkal Bureau

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