झालावाड़: शिवलिंग की आराधना से मिटते हैं जन्म-जन्मांतर के पाप, शिवपुराण कथा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
झालावाड़ के राधारमण डिप्टीजी मंदिर में आयोजित शिवपुराण कथा में उमड़ी भारी भीड़। कथावाचक संतोष सागर महाराज ने बताया कि शिवलिंग पूजन से पापों की मुक्ति और भैरूनाथ दर्शन से संकटों का नाश होता है। भंवर सिंह राठौड़, वीणा राठौड़ व अन्य यजमानों ने की पूजा-अर्चना। जानें शिव पूजन के नियम और धार्मिक महत्व इस विस्तृत रिपोर्ट में।

झालावाड़। धर्म और आस्था की नगरी झालावाड़ में इन दिनों भक्ति की अविरल धारा बह रही है। राधारमण डिप्टीजी के मंदिर परिसर में आयोजित भव्य शिवमहापुराण कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। कथा व्यास भाई संतोष सागर महाराज ने शिव तत्व की महिमा का गुणगान करते हुए कहा कि शिवलिंग की सच्चे मन से की गई पूजा मनुष्य को समस्त पापों के बंधन से मुक्त कर देती है। उन्होंने आध्यात्मिक गहराई के साथ श्रद्धालुओं को शिव पूजन के गूढ़ रहस्यों और मर्यादाओं से अवगत कराया।
महाराज ने विशेष रूप से ज्योतिर्लिंग दर्शन की पूर्णता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि काशी विश्वनाथ, उज्जैन के महाकाल सहित सभी प्रमुख ज्योतिर्लिंगों के दर्शन तभी सफल माने जाते हैं, जब भक्त भगवान भैरूनाथ बाबा के दर्शन करता है। भैरूनाथ की शरण में जाने से भक्त के जीवन के समस्त संकटों का नाश होता है और परिवार में सुख, समृद्धि एवं शांति का वास होता है। कथा के दौरान उन्होंने मंदिर की मर्यादा और पूजन विधि पर जोर देते हुए कहा कि नारी शक्ति को शिवलिंग का स्पर्श करने के बजाय हाथ जोड़कर प्रणाम करना चाहिए, साथ ही महिलाओं के लिए दंडवत प्रणाम वर्जित बताया गया है। वहीं पुरुषों के लिए निर्देश दिया कि उन्हें खड़े होकर नहीं, बल्कि बैठकर और दंडवत होकर शीश झुकाना चाहिए, क्योंकि यही शास्त्र सम्मत पद्धति है।
स्वच्छता को ईश्वर की सेवा बताते हुए उन्होंने आह्वान किया कि शिव मंदिर को सदैव साफ-सुथरा रखना चाहिए, क्योंकि निर्मल स्थान पर ही महादेव का वास होता है और वे मनवांछित फल प्रदान करते हैं। कथा के बीच जब भजनों की सुमधुर स्वर लहरियां गूंजी, तो पांडाल में मौजूद भक्तगण भाव-विभोर हो उठे और संगीत की धुन पर जमकर नृत्य किया।
कार्यक्रम के दूसरे दिन मुख्य यजमान भंवर सिंह राठौड़, वीणा राठौड़, पारसनाथ वर्मा और कृष्णा सिंह वर्मा ने पूर्ण विधि-विधान से शिव महापुराण की पूजा-अर्चना संपन्न की। आयोजन समिति द्वारा कथावाचक संतोष सागर महाराज का पुष्पहार पहनाकर आत्मीय स्वागत किया गया। इस आध्यात्मिक महाकुंभ में झालावाड़ शहर सहित आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं। कार्यक्रम का समापन शिव महापुराण की भव्य आरती और महाप्रसाद वितरण के साथ हुआ, जिसमें उपस्थित जनसमूह ने महादेव के जयकारों के साथ धर्म लाभ लिया।

Pratahkal Bureau
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