झालावाड़ में 'बर्तन घोटाला': गरीबों के निवाले पर अधिकारियों की नजर, 30 हजार के सामान का 1 लाख में भुगतान
झालावाड़ जिले की ग्राम पंचायतों में करोड़ों का 'बर्तन घोटाला' उजागर। CEO और BDO पर लगा 30 हजार के बर्तनों का 1 लाख में भुगतान कराने का आरोप। सरपंचों और ग्राम विकास अधिकारियों ने खोली भ्रष्टाचार की पोल। मदन दिलावर के क्षेत्र में लोकतंत्र की हत्या कर चलाए जा रहे राजतंत्र और वित्तीय आयोग फंड के दुरुपयोग की पूरी विस्तृत रिपोर्ट।

झालावाड़। राजस्थान के झालावाड़ जिले में लोकतंत्र की मर्यादाओं को ताक पर रखकर राजतंत्र चलाने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। राज्य सरकार और पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर की भ्रष्टाचार मुक्त शासन की मंशा को जिले के आला अधिकारी ही पलीता लगाने में जुटे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक और धार्मिक आयोजनों की सुविधा के लिए शुरू की गई 'बर्तन बैंक' योजना अब भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। झालावाड़ की 254 ग्राम पंचायतों में करोड़ों रुपये के इस घोटाले ने पंचायती राज व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पूरा मामला ग्राम पंचायतों में बर्तन खरीद से जुड़ा है। नियमानुसार ग्रामीणों की सुविधा के लिए प्रत्येक पंचायत में बर्तन बैंक स्थापित किए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर खेल कुछ और ही चल रहा है। आरोप है कि मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और विकास अधिकारियों (वीडियो) की जुगलबंदी ने एक ऐसी व्यवस्था बना दी है, जहां तीस हजार रुपये के बर्तनों का बिल एक लाख रुपये तक बनाया जा रहा है। यानी सीधे तौर पर सत्तर फीसदी राशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस घोटाले की पुष्टि खुद नाम न छापने की शर्त पर सरपंच और ग्राम विकास अधिकारी (VDO) कर रहे हैं।
सरपंचों का कहना है कि उन पर उच्च अधिकारियों का भारी दबाव है। सीईओ और विकास अधिकारियों के इशारे पर ही विशिष्ट वेंडरों से बर्तन खरीदे जा रहे हैं और टाइट-अनटाइट फंड (वित्तीय आयोग निधि) से उनका भुगतान कराया जा रहा है। एक ग्राम विकास अधिकारी ने गणित समझाते हुए बताया कि दो कटोरी, एक थाली, एक चम्मच और एक गिलास के सेट की वास्तविक कीमत लगभग 113 रुपये है। इस हिसाब से 400 सेट की कुल लागत मात्र 45,200 रुपये होती है, लेकिन पंचायतों से एक-एक लाख रुपये के बिल पास कराए जा रहे हैं। कई पंचायतों में तो पूरी सामग्री पहुंची भी नहीं है और भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।
इस पूरे प्रकरण में सबसे डरावना पहलू यह है कि यदि इस मामले की जांच होती है, तो बलि का बकरा सरपंच और सचिव ही बनेंगे। चूंकि भुगतान की फाइलों पर सरपंच और सचिव के हस्ताक्षर होते हैं, इसलिए कानूनी पेचीदगियों में वे ही फंसेंगे, जबकि मलाई का बड़ा हिस्सा ऊपर बैठे अधिकारियों तक पहुँच रहा है। चर्चा यह भी है कि झालावाड़ में पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर का रसूख होने के बावजूद अधिकारी बेखौफ हैं। ग्रामीणों और जन प्रतिनिधियों की मांग है कि जब तक इन प्रभावी अधिकारियों को पदों से नहीं हटाया जाता, तब तक निष्पक्ष जांच संभव नहीं है। यदि शासन सचिव किसी निष्पक्ष एजेंसी से इस 'बर्तन घोटाले' की जांच करवाते हैं, तो झालावाड़ की 254 पंचायतों में करीब दो करोड़ रुपये का यह भ्रष्टाचार उजागर हो सकता है।

Pratahkal Bureau
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