झालावाड़। पर्यटन विकास समिति झालावाड़ द्वारा सोमवार को गढ़ परिसर में शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू के बलिदान दिवस पर शहीदों की तस्वीर पर पुष्प अर्पित करके श्रद्धांजली देकर उनके बलिदान को याद किया गया। इस श्रद्धांजली कार्यक्रम से पर्यटन विकास समिति के संयोजक ओम पाठक ने कहा कि "मातृभूमि की रक्षा करने के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीद भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरू के बलिदान पर सभी भारतीयों को गर्व है।" उन्होंने आगे कहा कि इनके जीवन से राष्ट्रीय भावना जागृत करने की प्रेरणा मिलती है, आज के दिन सर्वोच्च बलिदान साहस और राष्ट्र प्रेम तथा स्वतन्त्रता संग्राम के अमर नायको को समर्पित है।

ऐतिहासिक स्मृतियों का स्मरण

इतिहासकार ललित शर्मा ने कार्यक्रम के दौरान महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्यों को साझा करते हुए बताया कि "09 मार्च 1965 को उज्जैन के छतरी चौक में शहीद भगत सिंह जी की माँ विद्यावती जी आई थी उन्होंने राष्ट्र कवि श्रीकृष्ण सरल के ग्रन्थ भगत सिंह महाकाव्य का लोकापर्ण किया था एवं 23 मार्च 1981 में उज्जैन के शहीद पार्क में दुर्गा भाभी भी आयी थी।" समिति सदस्य सालिगराम दांगी ने कहा कि शहीदों ने हमें "इंकलाब जिन्दाबाद" और "सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजु-ए-कातिल में है" जैसे नारे दिए जो आज भी हमें उनके साहस और निडरता की याद दिलाते है।

वीरता और देशभक्ति की प्रेरणा

डॉ. नन्द सिंह राठौड़ ने अपने संबोधन में कहा कि यह दिन हमें उनकी वीरता और बलिदान से प्रेरणा लेने और देश भक्ति की भावना को जीवित रखने की याद दिलाता है। झालावाड़ के गढ़ परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में उपस्थित सभी सदस्यों ने पुष्प अर्पित करके शहीदों को श्रद्धांजली देकर उनको याद किया। इस अवसर पर भगवती प्रकाश मेहर, मंजित सिंह कुशवाह, सूरजकरण नागर, अलीम बेग, लक्ष्मीकान्त पहाड़िया, लालचन्द रेगर, सूरजमल, गजानन्द, परथीराज, रामलाल, मोहनलाल सहित अनेक सदस्य मौजूद रहे।

Pratahkal Bureau

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