झालावाड़: पूर्व मुख्यमंत्री की सौगात में भ्रष्टाचार का 'कैंसर', बिना वित्तीय सलाहकार की अनुमति के बंदरबांट का खेल
झालावाड़ मेडिकल कॉलेज में करोड़ों के भ्रष्टाचार का खुलासा! पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की सौगात अब अवैध टेंडरों और भुगतान का अड्डा बन चुकी है। वित्तीय सलाहकार साधू लाल मीणा को दरकिनार कर अक्षय कुमार जैसे संविदा कर्मी चला रहे हैं करोड़ों का खेल। क्या 'राज मेष' की जांच दिलाएगी दोषियों को सजा? पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

झालावाड़। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने अपने प्रथम कार्यकाल के दौरान झालावाड़ की जनता को जिस मेडिकल कॉलेज की सौगात दी थी, वह आज भ्रष्टाचार के अंधेरे गलियारों में अपनी पहचान खोता जा रहा है। जनसेवा के लिए स्थापित यह संस्थान अब कथित रूप से 'पैसे छापने की मशीन' में तब्दील हो चुका है, जहाँ नियमों को ताक पर रखकर करोड़ों की हेराफेरी के संगीन आरोप लग रहे हैं।
कॉलेज के गलियारों से छनकर आ रही खबरें चौकाने वाली हैं। सूत्रों के अनुसार, इस संस्थान में पुराने भ्रष्टाचार के मामले अभी ठंडे भी नहीं हुए थे कि अब नए घोटालों ने पैर पसार लिए हैं। पुराने ऑडिट में अरबों रुपये के घोटाले के दस्तावेज आज भी साक्ष्य के रूप में मौजूद हैं, लेकिन वर्तमान में जो 'खेल' चल रहा है, उसने प्रशासनिक शुचिता पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि यहाँ मूल पद पर कार्य करने के बजाय संविदा और यूटीबी (UTB) कर्मियों का बोलबाला है। इनमें विशेष रूप से अक्षय कुमार का नाम चर्चाओं में है, जो कथित तौर पर अपने राजनीतिक रसूख के दम पर मेडिकल कॉलेज में यूटीबी आधार पर कार्यरत है। नियमानुसार यूटीबी का कार्यकाल मात्र छह माह का होता है, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से अक्षय कुमार पिछले तीन वर्षों से इस पद पर बने हुए हैं। इतना ही नहीं, उनकी शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा यहाँ तक पहुँच चुकी है कि झालावाड़ मेडिकल कॉलेज में अस्थाई और विवादित संविदा कर्मी आपस में मिलीभगत कर बड़े-बड़े टेंडर आमंत्रित कर रहे हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि इन टेंडरों और लाखों रुपये के भुगतान में कॉलेज के अधिकृत वित्तीय सलाहकार साधू लाल मीणा की कोई भूमिका नहीं है। नियमों की स्पष्ट अवहेलना करते हुए, बिना वित्तीय सलाहकार की मंजूरी के सामानों की खरीद और बिल पास किए जा रहे हैं। सरकारी नियमावली के अनुसार, वित्तीय सलाहकार की उपस्थिति में किसी भी संविदा या यूटीबी कर्मी द्वारा टेंडर प्रक्रिया संचालित करना पूरी तरह से नियम विरुद्ध और अवैध है।
यह मामला केवल प्रशासनिक चूक का नहीं, बल्कि एक सुनियोजित अपराध की ओर इशारा करता है। यदि 'राज मेष' (RAJMES) की उच्च स्तरीय टीम इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच करती है, तो इसमें लिप्त सफेदपोश और कर्मचारी सलाखों के पीछे नजर आ सकते हैं। झालावाड़ मेडिकल कॉलेज, जो कभी इस क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवा का गौरव था, आज प्रशासनिक मिलीभगत और भ्रष्टाचार का अड्डा बनकर रह गया है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस 'सिस्टम' की सफाई के लिए क्या कदम उठाता है।

Pratahkal Bureau
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