झालावाड़। अन्नदाता के हितों की रक्षा और कृषि क्षेत्र में शुचिता बनाए रखने के संकल्प के साथ भारतीय किसान संघ ने केंद्र सरकार के आगामी बीज विधेयक को लेकर मोर्चा खोल दिया है। झालावाड़ जिले के प्रवास पर पहुंचे भारतीय किसान संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य और राजस्थान-चित्तौड़ प्रांत प्रभारी राजेंद्र पालीवाल ने कृषि क्षेत्र की विसंगतियों पर गहरा प्रहार करते हुए केंद्र सरकार से नए कानून में व्यापक संशोधन की मांग की है। मुंबई में आयोजित अखिल भारतीय कार्यकारिणी की उच्चस्तरीय बैठक के निष्कर्षों को साझा करते हुए श्री पालीवाल ने स्पष्ट किया कि अब समय आ गया है जब नकली खाद, बीज और दवाइयों का व्यापार करने वालों को बख्शने के बजाय उनके विरुद्ध कड़ी सजा का प्रावधान सुनिश्चित किया जाए।

भारतीय किसान संघ का सबसे बड़ा प्रहार कंपनियों की जवाबदेही पर है। राजेंद्र पालीवाल ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में बीज या खाद के अमानक पाए जाने पर कंपनियां अपने छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाकर खुद को कानूनी कार्रवाई से बचा लेती हैं। किसान संघ की यह पुरजोर मांग है कि बीज फेल होने की स्थिति में सजा का सीधा उत्तरदायित्व बोर्ड ऑफ डायरेक्टर यानी कंपनी के मालिक का होना चाहिए। इसके साथ ही, यदि किसी कंपनी के खिलाफ तीन बार से अधिक शिकायतें प्राप्त होती हैं, तो उसे तत्काल ब्लैकलिस्ट कर उसका विवरण सरकारी पोर्टल पर सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि कोई अन्य किसान ठगी का शिकार न हो।

किसानों के आर्थिक नुकसान की भरपाई पर जोर देते हुए पालीवाल ने कहा कि यदि बीज खराब निकलता है, तो उससे प्रभावित होने वाली संभावित फसल का भुगतान भारत सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के आधार पर तत्काल किया जाना चाहिए। इस पूरी प्रक्रिया और शिकायतों का निस्तारण फसल कटने की अवधि के भीतर ही होना अनिवार्य है। बाजार में बिकने वाले प्रत्येक बीज का सर्टिफिकेशन अनिवार्य करने और उसकी अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) पर सरकार की कड़ी मॉनिटरिंग की आवश्यकता है, क्योंकि वर्तमान में मनमानी कीमतों के जरिए किसानों का आर्थिक शोषण चरम पर है।

जीएम (जेनेटिकली मॉडिफाइड) बीजों के मुद्दे पर राजेंद्र पालीवाल ने गंभीर वैज्ञानिक और स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं व्यक्त कीं। उन्होंने खुलासा किया कि फसलों को पाले से बचाने के लिए मछलियों के जीन और टमाटर को सख्त बनाने के लिए छिपकली के जीन का उपयोग करना मानव डीएनए के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि भारतीय किसान संघ जीएम बीजों के प्रवेश का पुरजोर विरोध करता है और अमेरिका जैसे देशों के टैरिफ दबाव के बावजूद भारत सरकार को इन घातक तकनीकों को अनुमति नहीं देनी चाहिए। यह संघर्ष न केवल किसानों की उपज को बचाने का है, बल्कि मानव जाति के स्वास्थ्य और पारंपरिक कृषि की शुद्धता को अक्षुण्ण रखने का भी है।

Pratahkal Bureau

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