झालावाड़: एसपी अमित कुमार के 'ऊर्जा प्रहार' और 'क्लीन राइड' पर प्रमोद शर्मा के आरोप
पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष प्रमोद शर्मा ने पुलिस अधीक्षक पर विभागीय कार्यों में हस्तक्षेप और व्यक्तिगत छवि निर्माण के लिए नियम विरुद्ध कार्रवाई के आरोप लगाए।

ऑपरेशन ऊर्जा प्रहार: विभाग पर 'अवैध अतिक्रमण' का दावा
प्रमोद शर्मा ने बताया कि "ऑपरेशन ऊर्जा प्रहार" जो की ऊर्जा विभाग यानी जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के अंतर्गत की गई कार्यवाही का भाग है। उन्होंने इस संदर्भ में निम्नलिखित तथ्य रखे:
- "जब मैंने जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के उच्च अधिकारियों से इस ऑपरेशन की पूर्ण जानकारी लेना चाही तो ज्ञात हुआ कि पुलिस, विभाग के अधिकारियों को या तो मध्य रात्रि में या सुबह 4-5 बजे फोन कर जब अपराधी या किसी संदिग्ध के यहां दबिश देती थी, तो उन्हें बार-बार फोन करके अचानक उस सस्पेक्ट के यहां पर बुलाया जाता था और उसके घर का बिजली कनेक्शन विच्छेद करने को कहा जाता था।"
- कई बार ऐसी परिस्थिति बन जाती थी कि उस सस्पेक्ट की जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड की कोई बकाया राशि रहती ही नहीं थी, तो उन पर पुलिस अधीक्षक अमित कुमार द्वारा दबाव बनाया जाता था।
- इस कारण जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के अधिकारी व कर्मचारी ऐसे मौकों पर पुलिस से व्यापक दूरी बना लेते थे।
शर्मा ने कहा कि जब उच्च अधिकारियों से बात हुई तो उन्होंने बताया कि उनके पास एक विद्युत थाना है जहां पर्याप्त मात्रा में फोर्स है। जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के पास अपनी एक विजिलेंस टीम है व संपूर्ण विभाग के अधिकारी व कर्मचारी समय-समय पर अभियान चलाकर बिजली चोरी व अवैध कनेक्शन के ऊपर कानून सम्मत कार्यवाही कर उसकी वीसीआर भरी जाती है, जिससे उनके ऊपर पेनल्टी लगाई जाती है। इसमें विभाग का समस्त स्टाफ कभी पुलिस की मदद नहीं लेता, वह एक स्वतंत्र विभाग है। प्रमोद शर्मा के अनुसार, इस प्रकार की कार्यवाही विभाग के क्रियाकलापों पर अवैध अतिक्रमण है।
निजी हितों और वाह-वाही लूटने के आरोप
शर्मा ने पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के "ऑपरेशन ऊर्जा प्रहार" पर प्रहार करते हुए कहा:
"इसकी पूर्ण योजना अमित कुमार ने अपने निजी हितों को साधने के लिए बनाई, जिसमें जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के अधिकारियों, कर्मचारियों और विद्युत थाना पुलिस को शामिल कर एक जॉइंट ऑपरेशन का नाम दिया 'ऊर्जा प्रहार'। इस ऑपरेशन के अगले दिन समाचार पत्रों और टीवी मीडिया की सुर्खियों में एसपी अमित कुमार रहे, जहाँ विभाग को गौण कर दिया गया।"
यहां यह प्रश्न उठना लाजिमी है कि इससे हिस्ट्रीशीटरों, तस्करों सहित 660 आरोपियों को बिजली चोरी करते पकड़ा, जिसमें 1.20 करोड़ का जुर्माना वसूल किया गया। इस संपूर्ण घटनाक्रम में जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड पुलिस अधीक्षक अमित कुमार का अर्दली बन कर उनके आदेशों की पालना में लगा रहा। क्या एसपी अमित कुमार विभाग के कार्यों को स्वयं अपने हाथ में ले, कार्यवाही विभाग के माध्यम से देते हैं लेकिन वाह-वाही खुद लूट कर, प्रशस्ति पत्र प्राप्त कर फोटो सेशन में लग जाते हैं, क्या यह विभाग के अधिकारों का हनन नहीं है?
ऑपरेशन क्लीन राइड: रोडवेज की कार्यप्रणाली में हस्तक्षेप?
इसी प्रकार प्रमोद शर्मा ने "ऑपरेशन क्लीन राइड" की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि यहाँ भी जब शर्मा ने राजस्थान पथ परिवहन निगम लिमिटेड के झालावाड़ सहित जयपुर बैठे उच्च अधिकारियों से दूरभाष पर वार्ता की, तो ज्ञात हुआ कि पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने ही इस ऑपरेशन की भी अपने ही विभाग में रचना तैयार कर बिना किसी विभागीय शिकायत के स्वयं को हर विभाग का अधिष्ठाता समझ, बिना राजस्थान पथ परिवहन निगम लिमिटेड के किसी भी अधिकारी को विश्वास में लिए बगैर राजनेताओं के इशारों पर "ऑपरेशन क्लीन राइड" का नाम दिया।
शर्मा ने रोडवेज की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था का उल्लेख करते हुए बताया:
- राजस्थान पथ परिवहन निगम लिमिटेड के विभाग में विजिलेंस टीम, भ्रष्टाचार अनियमितताओं और टिकट चोरी को रोकने के लिए कार्य करती है।
- यह टीम बस निरीक्षण, औचक निरीक्षण और शिकायतों के आधार पर जांच कर रिपोर्ट मुख्यालय को सौंपती है।
- मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO) के नेतृत्व में यह टीम राजस्थान रोडवेज के परिचालन में पारदर्शिता सुनिश्चित करती है।
- RSRTC विजिलेंस टीम की SOP की कार्यप्रणाली का नेतृत्व विजिलेंस विभाग के प्रमुख सतर्कता अधिकारी होते हैं। इस टीम में EM विजिलेंस जैसे अधिकारी द्वारा बस का औचक निरीक्षण करवाया जाता है, जिसमें बिना टिकट यात्रा या कंडक्टर द्वारा टिकटों में हेराफेरी की जांच शामिल होती है।
"एसटीडी गिरोह" और पुलिस की भूमिका पर सवाल
शर्मा ने कहा कि इतना सब होते हुए भी अगर कोई भारी गड़बड़ी किसी और के माध्यम से की जाती है, जैसे झालावाड़ में स्वयं संज्ञान लेते हुए बिना विभागीय जानकारी के पुलिस अधीक्षक द्वारा "एसटीडी गिरोह" पर कार्यवाही की गई। पुलिस के कथनानुसार इस गिरोह द्वारा हर माह कंडक्टरों से एक करोड़ वसूले जाते हैं, जो कंडक्टरों को फ्लाइंग के पहुंचने से पहले फोन पर सचेत कर देते थे ताकि बिना टिकट यात्री को टिकट देकर गाड़ी कंप्लीट कर ली जाए। इससे रोडवेज को भारी नुकसान हो रहा था।
शर्मा ने तीखे सवाल उठाते हुए कहा:
"क्या यह घाटा जो रोडवेज को हो रहा था, इसकी जानकारी रोडवेज के मुख्यालय से लेकर जिला केंद्र पर बैठे अधिकारियों या विजिलेंस के अधिकारियों को नहीं होती है? क्या रोडवेज की फ्लाइंग जिसमें टीआई और एटीआई व उनके सहयोगियों को नहीं होती है? इन सबका उस चोरी में बराबर का हिस्सा होता है।"
शर्मा ने बताया कि रोडवेज में यह एसटीडी द्वारा सूचना देने का हर जिले में अपना एक नेटवर्क है और इसमें आमजन भी 50 से 20 रुपये के लिए यह करता है। झालावाड़ में यह काम 1990 से ही चलता आ रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1990 में रोडवेज मुख्यालय द्वारा राज्य सरकार को पत्र लिखकर एक MJM स्तर के न्यायाधीश अधिकारी और पुलिस के उपाधीक्षक स्तर के अधिकारियों की टीम बनाकर कार्यवाही की गई थी, जो दो-तीन वर्षों तक चली।
अंत में शर्मा ने आरोप लगाया कि आज झालावाड़ में ऑपरेशन क्लीन राइड को लेकर रोडवेज मुख्यालय से झालावाड़ पुलिस को ऐसी सहायता नहीं मांगी गई, यहाँ तो पुलिस अधीक्षक अमित कुमार स्वयं हर विभाग के अधिष्ठाता बन उन पर अतिक्रमण कर वाह-वाही लूटने में लगे हैं।

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